जम्मू। प्रदूषण की बढ़ती समस्या को देखते हुए खिलाड़ियों ने भी इस बार प्रदेश वासियों से ईको-फ्रेंडली दिवाली मनाने का संदेश दिया है। बढ़ता प्रदूषण आज पूरे विश्व के लिए चिंता बन गया है। हवा में लगातार घुलता जहर बीमारियों का कारण बन रहा है। दिवाली पर पटाखों के कारण पर्यावरण में प्रदूषण और बढ़ता है। एनजीटी और कई राज्य सरकारों ने प्रदूषण की रोकथाम के लिए पटाखों को बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
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मैने पिछले पांच वर्ष से पटाखे नहीं चलाए हैं। हर दिवाली सिर्फ दीप जलाकर मनाता हूं। पटाखे प्रदूषण का कारण बनते हैं, हमे इस बात को स्वीकार करना होगा। एक अच्छा नागरिक होने के नाते हमें पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान देना होगा। दिवाली प्रेम का पर्व है, जिसमें पटाखों से निकलने वाला जहरीला धुआं बीमारियां पैदा करता है। अभी से अपनाई जाने वाली सतर्कता ही भविष्य में इसका लाभ देगी।
शुभम खजूरिया, रणजी क्रिकेटर
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जिस तरह से प्रदूषण बढ़ रहा है, अब हमें सतर्क होने की जरूरत है। प्रदूषण जानलेवा बीमारी पैदा करता है, जिसका इलाज हम सबकी जागरूकता है। इस दिवाली पर कम से कम पटाखे चलाए और पर्यावरण को साफ रखने में अपना योगदान दें। प्रदूषण कोविड से भी ज्यादा घातक हो सकता है। पर्यावरण में घुलता जहर हमारे और आने वाली पीढ़ी के लिए नुकसानदायक है। इसलिए हमें अभी से सतर्कता बरतने की जरूरत है।
शुभम पुंडीर, रणजी क्रिकेटर
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दिवाली पर्व भगवान श्रीराम की लंका पर विजय पाने और अयोध्या वापस लौटने की खुशी में मनाया जाता है। यह खुशियों का त्योहार है, जिसमें हमें पटाखों की जहरीली हवा नहीं घोलनी चाहिए। वर्तमान सयम में प्रदूषण विकासशील देशों के साथ विकसित देशों के लिए भी चुनौती बना हुआ है। हमें अभी से प्रदूषण के खिलाफ जंग छेड़नी चाहिए।
विजय डोगरा, क्रिकेटर
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कोविड जैसी महामारी के साथ प्रदूषण का बढ़ता स्तर चिंता का कारण है। प्रदूषण से सांस संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। जलवायु परिवर्तन हमारे सामने उदाहरण है। ऐसे में हमें अपनी आदतों को बदलना होगा। प्रदूषण की रोकथाम सभी की जिम्मेदारी होनी चाहिए। दिवाली पर पटाखे चलाने से प्रदूषण बढ़ता है, अगर हम पटाखे नहीं चलाएंगे तो यह हमारी ओर से पर्यावरण संरक्षण में योगदान होगा।
साहिल मेहरा, योग परीक्षक