बिलावर। मांडली गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को कई गांवों से श्रद्धालु पहुंचे, जिन्हें कथावाचक सुभाष शास्त्री ने प्रवचन से निहाल किया। कथावाचक ने कहा कि वेद, पुराण व समस्त ग्रंथ कहते हैं कि प्रभु की भक्ति बिना कभी भी सच्चा सुख नहीं मिल सकता। कथावाचक ने कहा कि मनुष्य जो भी सरल से सरल अथवा कठिन से कठिन भौतिकी या अनैतिक कार्य करता है, उसके पीछे एक ही लक्ष्य होता है सुख की प्राप्ति।
उन्होंने कहा कि असल में मनुष्य कोठी, बंगले, कार आदि सुख भोगने का प्रयास करता है। चाहे वह सब कुछ उसने अनीति से, भ्रष्टाचार से, पाप कर्मों से संग्रहित किया हो। ऐसे साधनों से आत्मिक सुख कैसे प्राप्त हो सकता है। कथावाचक ने कहा कि समस्त ऋषियों, महाऋषियों का मत है कि प्रभु की भक्ति के बिना जो भी सुख मनुष्य जिस किसी भी उपाय से अनुभव करता है, वह वास्तविक सुख है ही नहीं। यह सभी प्रकार के सुख वास्तव में सुख नहीं, बल्कि दुख की जननी है।
कथावाचक ने कहा कि यदि किसी के माता-पिता, पति-पत्नी, भाई-बंधु, पुत्र, मित्र आदि बुरे हों, तो जीते जी दुख देते हैं। यदि अनुकूल हों तो जिस दिन यह नहीं रहेंगे तो दुख होगा। बुरे व्यक्ति के सहयोग से दुख है और अच्छे के वियोग से दुख होता है। भगवान से यदि योग नहीं होगा, तो संसार में संयोग-वियोग का दुख तो होगा ही। भगवान को छोड़कर और किसी से, कहीं से भी सुख मिलने की जो आशा है इसमें शंका है कि मिले न मिले।
कथावाचक ने कहा कि मिला हुआ सुख कब तक रहेगा, इसमें भी शंका रहती है। लेकिन हम मरेंगे या नहीं इसमें तो कोई शंका नहीं है। इसलिए अमर अविनाशी सहज सुख केवल परमात्मा है। उसकी भक्ति में लग जाना ही परमसुख है। इसी सुख की आशा मनुष्य को सदैव रहती है। परंतु के धर्म मार्ग पर चलने से ही सुख बहुत सरलता से प्राप्त हो सकता है। आयोजकों के अनुसार 12 नवंबर को कथा का समापन होगा और भंडारे का आयोजन भी होगा।