भारतीय सेना की 16 पंजाब (पटियाला) शाखा के शहीद 22 वीर सैनिकों को याद किया गया।
ज्यौड़ियां। वर्ष 1971 में छंब सेक्टर में सरहद की रक्षा करते हुए शहीद हुए सेना की 16 पंजाब (पटियाला) के सैनिकों के बलिदान को याद करते हुए मंगलवार को हमीरपुर सिदड् (अखनूर) में नवनिर्मित शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि दी गई।
बता दें कि छंब सेक्टर में वर्ष 1971 के युद्ध में सेना की 16 पंजाब (पटियाला) के 22 वीर सैनिकों द्वारा देश की रक्षा करते हुए दिए गए बलिदान को आज पचास साल बाद याद किया गया है। खौड़ के गांव हमीर सिदड़ (घिगडयाल बटालियन के अधीन) शहीद सभी 22 सैनिकों की याद में एक स्मारक बनाया गया। जहां 16 पंजाब (पटियाला) शाखा के पूर्व सैनिकों तथा पूर्व अधिकारियों ने भाग लिया। आज के कार्यक्रम में 1971 में युद्ध के दौरान 16 पंजाब की कमान संभाले कर्नल पीसी शर्मा (सेवानिवृत्त) भी उपस्थित रहे। जिन्होंने 1971 के युद्ध के पूरे हालात बताए। उन्होंने बताया कि 16 पंजाब (पटियाला) ने 1971 में छंब संप्रदाय में दो अलग-अलग प्रमुख ऑपरेशनों में लड़ाई लड़ी। दुश्मन की तखखो चक और हैैैल मनहासन पोस्ट पर हमला किया।
12/13 दिसंबर 1971 की रात को सेना की 16 पंजाब (पटियाला) की सी कंपनी के जवानों ने पाक क्षेत्र के दो किलोमीटर अंदर हेल मनहासन में दुश्मन की चौकी को नष्ट करने की योजना बनाई। हमारी पूरी कंपनी अंधेरे की आड़ में चली गई और 13 दिसंबर 1971 को 01: 00 बजे तक पूरा उद्देश्य हासिल कर लिया। पीसी शर्मा ने बताया कि हमारी बटालियन को 10 इन्फैंट्री डिवीजन द्वारा तखखो चक पोस्ट पर हमला कर कब्जा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई और 14/15 दिसंबर 1971 की रात को हमारी बटालियन की डी कंपनी ने तखखो चक पर हमला किया।। दुशमन ने अपनी मैंगो ट्री, पीपल पोस्ट तथा तखखो चक से हम पर गोलाबारी की। हमें दुश्मन की चौकियों से हमलावर सैनिकों को भारी मात्रा में गोलाबारी का सामना करना पड़ा। सैनिकों ने पूरे दुश्मन पलटन को खत्म करके आम का ट्री पोस्ट पर कब्जा कर लिया। 16 पंजाब पटियाला का उस दौरान एक जेसीओ और 21 जवानों ने ऑपरेशनों में प्राणों की आहुति दी, 22 जवान जख्मी हुए, जिनमें कैप्टन बीएस रगीं तथा सुबेदार हरचीत सिंह भी शामिल रहे। आज इस कार्यक्रम में कर्नल पीसी शर्मा (सेवानिवृत्त), कर्नल बीएस रंगी (सेवानिवृत्त) और कर्नल केवाईएस मिन्हास (सेवानिवृत्त) और 1971 में युद्ध में भाग लेने वाले 16 पंजाब (पटियाला) के दिग्गजों ने वीर सैनिकों को पचास साल बाद श्रद्धांजलि अर्पित की।