आरएस पुरा। दबलैड़ में रविवार को भगत अमरनाथ को याद कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान मीठे पानी की छबील लगाकर राहगीरों की प्यास बुझाई गई। उनकी याद में चिकित्सा शिविर लगा ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच कर जरूरतमंदों को दवा भी दी गई।
वक्ताओं ने बताया कि वर्ष 1918 में बटोट तहसील और जिला रामबन के पास चंपा गांव में मेघ परिवार में जन्मे भगत अमरनाथ ने स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद समाज के पिछड़े वर्ग के उत्थान में योगदान दिया।
उन्होंने अपने खुद के जीवन को दलितों के लिए समर्पित कर दिया। वे बचपन से ही मानवाधिकारों से वंचित उत्पीड़ित एवं शोषित वर्ग के लोगों की भलाई के लिए प्रयासरत रहते थे। वर्ष 1970 में राज्य सरकार ने दलित समाज को आरक्षण के अधिकार से वंचित किया तो उनके नेतृत्व में पूरे जम्मू प्रांत में लगातार आंदोलन किया गया।
मांग पूरी कराने के लिए वे 21 मई 1970 को जम्मू में नागरिक सचिवालय के सामने करण पार्क में आमरण अनशन किया और एक जून 1970 को निधन होने पर वह आरक्षण के शहीद और जम्मू-कश्मीर के आंबेडकर कहलाए।
इस मौके पर डॉ. राजेश भगत, पूर्व सरपंच स्वर्ण लाल भगत, नंबरदार तिलक राज, अशोक कुमार, जगदीश राज, बाबू राज, बोधराज, रामलाल, सोमनाथ, यशपाल आदि मौजूद रहे।