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- फोटो : PTI
एसएसबी के सहायक उप निरीक्षक पुरुषोत्तम कुमार श्रीनगर के सेकिदाफार एरिया में चार अगस्त की रात से तैनात हैं। हिमाचल के रहने वाले पुरुषोत्तम बताते हैं कि युवाओं के छोटे-छोटे समूह गलियों से निकलते हैं और हम पर पथराव कर भाग जाते हैं। अरुणाचल प्रदेश के खोबराम द्रवि जो उनके सीनियर हैं वह बताते हैं कि कई तरह की चुनौतियां हैं। सिकिदाफार के पास एसएमएचएस अस्पताल की ओर जाने वाले क्षेत्र की रखवाली करते हुए उन्हें स्पष्ट करना है कि इस रास्ते पर 24 घंटे में कभी भी दिक्कत न हो। इस रास्ते का उपयोग मरीज करते हैं और हम उनके लिए किसी तरह की देरी नहीं करना चाहते हैं। कुछ उपद्रवी तत्व इसे नहीं समझते हैं। हम आसपास के इलाके के लोगों से बात करते रहते हैं परंतु कुछ बदला नहीं है।
-सावधानी हटी, दुर्घटना घटी
सीआरपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट भानु शेखर टार्च के साथ प्रत्येक वाहन की सावधानी पूर्वक चेकिंग करते हैं। वह कहते हैं कि जवान लंबे समय तक ड्यूटी करने के बाद थक जाते हैं और मनोबल ऊंचा रखना जरूरी है। उन्हें प्रेरित रखना पड़ता है और मैं अक्सर उन्हें व्याख्यान देता हूं। वह साथियों को बताते हैं कि नए कश्मीर के निर्माण में वह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। रात के समय आसमान पर भी नजर रखनी होगी। कब कोई ग्रेनेड या पेट्रोल बम फेंक दे, यह कोई नहीं जानता। कुछ शरारती तत्व सीआरपीएफ कर्मियों को उकसाने की कोशिश करते हैं, लेकिन हम अनुशासित बल हैं। असामाजिक तत्व आम तौर पर बुजुर्गों और बच्चों को आगे कर हम पर पथराव करते हैं। वह जानते हैं कि हम बच्चे व बूढ़ों के सामने होने पर कभी भी लाठीचार्ज नहीं करेंगे। यह आप सामने की जो सड़क देख रहे हैं यह डाउन टाउन इलाके को कनेक्ट करती है। इस पर ज्यादा सावधानी रखनी पड़ती है क्योंकि सावधानी हटी और दुर्घटना घटी।
-रात में भी आते हैं जवानों के घर से फोन
यादव ने कहा, जवानों को अपने परिवार के साथ कुछ समय के लिए अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन के दौरान घर पर बातचीत की अनुमति है। इसके लिए प्रत्येक कंपनी कमांडर को एक फोन दिया गया है। भानुशेखर ने कहा, कई बार रात में जवानों के परिवारों के फोन आते हैं जब मेरे कान में उनकी बातें पड़ती हैं तो मैं खुद को उनके परिवार का हिस्सा पाता हूं।