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रात होते ही बढ़ जाती है कश्मीर को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी, सुनिए जवानों की जुबानी उनकी कहानी

Mon, 19 Aug 2019 03:45 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

-ये जवान पांच अगस्त के बाद से श्रीनगर और कश्मीर घाटी में स्थापित कानून और व्यवस्था को बनाए रखने में लगे हुए हैं
-रात में भी आते हैं जवानों के घर से फोन
-सावधानी हटी, दुर्घटना घटी
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सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ जवान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से अर्द्ध सैनिक बल के जवान कभी-कभी सुबह से शाम तक और शाम से सुबह तक स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए तत्पर हैं। अपने घर से कई सौ मील दूर यहां डटे ये जवान कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने में लगे हुए हैं। 

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यहां रात जैसे-जैसे अपने उरूज की ओर बढ़ती है, लोग नींद की आगोश में समा जाते हैं। लेकिन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान सूनसान पड़ी सड़कों पर लाठियों और अन्य हथियारों के सहारे किसी भी खतरे से निपटने के लिए घाटी के इस प्रमुख शहर में सतर्क हैं।

ये जवान पांच अगस्त के बाद से श्रीनगर और कश्मीर घाटी में स्थापित कानून और व्यवस्था को बनाए रखने में लगे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन जवानों के लिए रात ज्यादा चुनौतियां लेकर आती है। इनके कामकाज के घंटे कभी खत्म नहीं होते। रात से शुरू होकर यह सुबह तक जारी रहते हैं। 
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उत्तर प्रदेश के सीआरपीएफ सहायक कमांडेंट संजीव यादव और बिहार के भानु शेखर शहर में अक्सर रात में गश्त करते हैं। यादव ने डल झील के आसपास के इलाकों में अपनी टीम के डल झील एरिया के अंदरूनी इलाको में गश्त करने के दौरान कहते हैं कि इलाज से एहतियात बेहतर है। वह कहते हैं कि दिनभर थका देने वाली ड्यूटी के बाद जवानों के लिए रात की ड्यूटी आसान नहीं होती। क्योंकि रात में सिर्फ गश्त ही नहीं करनी होती बल्कि यह भी देखना पड़ता है कि कहीं आतंकवादियों ने आईईडी जैसे विस्फोटक तो नहीं लगा दिए हैं। पांच अगस्त के बाद डाउन टाउन जैसे इलाकों में चौबीस घंटे जवान तैनात हैं। इसका उद्देश्य है कि न सिर्फ पत्थरबाजों पर नजर रखी जाए बल्कि इन्हें निकलने ही न दिया जाए।
 

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-पथराव कर गायब हो जाते हैं युवा

kashmir latest photos after article 370 revoked - फोटो : PTI
एसएसबी के सहायक उप निरीक्षक पुरुषोत्तम कुमार श्रीनगर के सेकिदाफार एरिया में चार अगस्त की रात से तैनात हैं। हिमाचल के रहने वाले पुरुषोत्तम बताते हैं कि युवाओं के छोटे-छोटे समूह गलियों से निकलते हैं और हम पर पथराव कर भाग जाते हैं। अरुणाचल प्रदेश के खोबराम द्रवि जो उनके सीनियर हैं वह बताते हैं कि कई तरह की चुनौतियां हैं। सिकिदाफार के पास एसएमएचएस अस्पताल की ओर जाने वाले क्षेत्र की रखवाली करते हुए उन्हें स्पष्ट करना है कि इस रास्ते पर 24 घंटे में कभी भी दिक्कत न हो। इस रास्ते का उपयोग मरीज करते हैं और हम उनके लिए किसी तरह की देरी नहीं करना चाहते हैं। कुछ उपद्रवी तत्व इसे नहीं समझते हैं। हम आसपास के इलाके के लोगों से बात करते रहते हैं परंतु कुछ बदला नहीं है।

-सावधानी हटी, दुर्घटना घटी
सीआरपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट भानु शेखर टार्च के साथ प्रत्येक वाहन की सावधानी पूर्वक चेकिंग करते हैं। वह कहते हैं कि जवान लंबे समय तक ड्यूटी करने के बाद थक जाते हैं और मनोबल ऊंचा रखना जरूरी है। उन्हें प्रेरित रखना पड़ता है और मैं अक्सर उन्हें व्याख्यान देता हूं। वह साथियों को बताते हैं कि नए कश्मीर के निर्माण में वह महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। रात के समय आसमान पर भी नजर रखनी होगी। कब कोई ग्रेनेड या पेट्रोल बम फेंक दे, यह कोई नहीं जानता। कुछ शरारती तत्व सीआरपीएफ कर्मियों को उकसाने की कोशिश करते हैं, लेकिन हम अनुशासित बल हैं। असामाजिक तत्व आम तौर पर बुजुर्गों और बच्चों को आगे कर हम पर पथराव करते हैं। वह जानते हैं कि हम बच्चे व बूढ़ों के सामने होने पर कभी भी लाठीचार्ज नहीं करेंगे। यह आप सामने की जो सड़क देख रहे हैं यह डाउन टाउन इलाके को कनेक्ट करती है। इस पर ज्यादा सावधानी रखनी पड़ती है क्योंकि सावधानी हटी और दुर्घटना घटी। 

-रात में भी आते हैं जवानों के घर से फोन
यादव ने कहा, जवानों को अपने परिवार के साथ कुछ समय के लिए अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन के दौरान घर पर बातचीत की अनुमति है। इसके लिए प्रत्येक कंपनी कमांडर को एक फोन दिया गया है। भानुशेखर ने कहा, कई बार रात में जवानों के परिवारों के फोन आते हैं जब मेरे कान में उनकी बातें पड़ती हैं तो मैं खुद को उनके परिवार का हिस्सा पाता हूं।
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