जम्मू-कश्मीर में राज्य पुनर्गठन एक्ट लागू होने के बाद पाकिस्तान से सटे इलाकों में भी धरातल पर बदलाव दिखने लगा है। एलओसी की तर्ज पर अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ लगते क्षेत्र के लोगों को आरक्षण के साथ अब तारबंदी के आगे फसलें भी लहलहाने लगी हैं। जम्मू संभाग के आरएसपुरा, सांबा और हीरानगर में पाकिस्तानी से लगती सीमा पर किसान बीएसएफ की मदद से तारबंदी से आगे जाकर खेती करने लगे हैं। गोलीबारी के डर एवं पानी के अभाव में पहले किसानों ने यहां खेती करना छोड़ दी थी।
अब बीएसएफ की निगरानी में कुछ क्षेत्रों में खेती शुरू हो गई, जबकि हीरानगर जैसे इलाकों में इस बार गेहूं की बिजाई की तैयारी है। तारबंदी के आगे करीब सोलह वर्षों से बंजर पड़ी जमीन पर खेती करने का मौका मिलेगा। कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर में तारबंदी के आगे 13 सौ कनाल भूमि पर जल्द ही गेहूं की फसल लहलहाएगी। नवंबर माह में बुआई का काम शुरू हो जाएगा। फिलहाल जमीन को खेती योग्य बनाने का काम अंतिम चरण में है। वर्ष 2002 में तनावपूर्ण हालात के बाद से तारबंदी के आगे खेती का काम बंद पड़ा हुआ है।
सांबा में दस्तावेजों की हो रही जांच
सांबा जिले में तारबंदी के आगे किसानों की 7400 कनाल बंजर हो चुकी जमीन पर भी फसल लहहाने की तैयारी चल रही है। कारगिल युद्ध के बाद किसानों ने जीरो लाइन के निकट की खेती को छोड़ दिया। जमीन अब बंजर हो चुकी है। इसमें राजपुरा तहसील की 2500 कनाल, सांबा तहसील की 3000 कनाल और रामगढ़ तहसील की 1900 कनाल भूमि शामिल है। राजस्व विभाग इन जमीनों के रिकार्ड जांचने में जुटा है।
आरएस पुरा में 15186 कनाल जमीन पर लहलहा रही फसल
जम्मू जिले की आरएस पुरा और सुचेतगढ़ तहसील में अंतरराष्ट्रीय सीमा से आगे 15186 कनाल जमीन पर फसलें लहलहा रही हैं। पानी और किसानों की सुरक्षा की व्यवस्था कर इस क्षेत्र में तारबंदी के आगे वर्षों से खाली पड़ी जमीन पर इस वर्ष दो फसलें ली जा चुकी हैं। यहां किसान बीएसएफ की देखरेख में कृषि कार्य कर रहे हैं।
(अरुण खजूरिया/प्रीत चौधरी/सुभाष चंद्र)