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जम्मू-कश्मीरः लॉकडाउन में फूलों की खेती पर संकट, मांग न होने से बिक्री शून्य

Wed, 15 Apr 2020 12:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा सतीश वालिया, जम्मू
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फूलों की खेती - फोटो : अमर उजाला
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लॉकडाउन के कारण प्रदेश में फूलों का कारोबार मंदा चल रहा है। नवरात्र के बाद बैसाखी पर्व पर भी फूलों की डिमांड न के बराबर है। इस कारण फूल नर्सरियों में ही खराब हो रहे हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा गेंदा और गुलाब की खेती की जाती है। मंदिरों में चढ़ाने के लिए हर रोज जम्मू शहर में 50 से 55 क्विटंल फूल की डिमांड रहती है लेकिन फिलहाल यह डिमांड शून्य के बराबर है। 

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शहर के शालामार चौक, बाबे वाली माता मंदिर, आप शंभू, शिव मंदिर तवी पुल समेत विभिन्न मंदिरों के पास फूल बेचे जाते हैं। वहीं आरएस पुरा समेत कई इलाकों में फूलों की खेती होती है। फ्लोरीकल्चर विभाग के अनुसार फूलों की डिमांड न आने के कारण अभी तक दो करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। लॉकडाउन के कारण खेती पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। 

फूलों को न तोड़ने के कारण फूल सूखने शुरू हो गए हैं। मौजूदा समय में मंदिर भी बंद चल रहे हैं। सबसे ज्यादा फूलों की डिमांड नवरात्र में वैष्णो देवी मंदिर में रहती है। वहीं बैसाखी पर गुरुद्वारों को सजाने के लिए लाखों फूलों का ऑर्डर दिया जाता है लेकिन इस बार फूल व्यवसायियों को तगड़ा नुकसान हुआ है। 
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प्रदेश में एक हजार से ज्यादा नर्सरी पंजीकृत
फ्लोरीकल्चर विभाग के अनुसार प्रदेश भर में एक हजार छोटी और बड़ी नर्सरी हैं। इनके माध्यम से हर मौसम में फूल प्रदेश और बाहरी राज्यों को भेजा जाता है। भेजने की व्यवस्था विभाग स्वयं करता है और इससे मुनाफा नर्सरी मालिक कमाते हैं। इसके अलावा खेतों में अलग से फूलों की खेती होती है। हर सीजन में दो से तीन करोड़ के फूल का व्यापार होता है। 

लॉकडाउन के कारण फूल व्यवसायियों का धंधा मंदा रहा है। हालात ठीक होने के बाद ही व्यापार हो सकेगा। मौजूदा समय में सबको कोरोना से बचने की जरूरत है। ऐसे में फूल को बाहर भी नहीं भेजा जा सका है। 
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-सतीश कौल सुल्तान, उपनिदेशक, फ्लोरीकल्चर

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