76 फीसदी अंक हासिल करने के बावजूद डोडा जिले के एक मेधावी छात्र ने फंदा लगाकर मौत को गले लगा लिया। वह इतने अंक से संतुष्ट नहीं था। वह 95 फीसदी तक अंक हासिल करने की उम्मीद कर रहा था। परीक्षा परिणाम आने के बाद से ही छात्र बुरी तरह टूट चुका था।
प्रतिस्पर्धा की दौड़ से विद्यार्थियों पर बढ़ते मानसिक दबाव का एक और दुष्परिणाम सामने आया। दो दिन पहले विंटर जोन के दसवीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम आया। इसमें बगला भरत के रहने वलो पंद्रह वर्षीय छात्र सादिक हुसैन ने 76 फीसदी अंक हासिल किया।
हालांकि उसने डिस्टिंगशन हासिल किया, लेकिन उसकी महत्वाकांक्षा काफी अधिक थी। वह काफी मेधावी छात्र था। बताया जाता है कि परीक्षा परिणाम आने के बाद से ही वह गुमशुम रहने लगा।
परीक्षा परिणाम आने के बाद से ही था गुमशुम
वीरवार की सुबह परिवार के सभी सदस्य सोकर जागे, पर वह नहीं उठा। पहले तो परिवार वाले समझते रहे कि सादिक देर से सोया होगा, लेट उठेगा। लेकिन दोपहर तक जब वह कमरे से नहीं निकला तो परिवार वालों ने दरवाजा खटखटाया।
कमरे से कोई जवाब नहीं आया। दरवाजा तोड़ने पर सब के सब हक्का-बक्का रह गए। सादिक पंखे के सहारे फंदे से लटका हुआ था। उसे आनन-फानन में उतारा गया, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी।
शोक में डूबे परिवार वालों ने बताया कि सादिक 90 से 95 फीसदी के बीच अंक आने की उम्मीद लगा बैठा था। परिणाम आने से पहले वह काफी उत्साहित था। जब उसे 76 फीसदी अंक आया तो वह जैसे सदमे में चला गया। उसे काफी समझाया-बुझाया भी गया, लेकिन वह बहुत उदास था।