नेशनल हाईवे के तेज मोड़ों पर रश ड्राइविंग कई लोगों की जान ले रही है। एक्सप्रेस वे जैसे हाईवे पर लोगों की गति अनियंत्रित हो रही है। इसका नतीजा सड़क हादसों में दुगनी बढ़ोतरी होना है।
मौजूदा वर्ष में हाईवे के दो पुलिस स्टेशनों में सड़क हादसों के ही इतने मामले दर्ज हुए हैं, जितने कई थानों के साल भर के मामले नहीं।
इन मामलों में अधिकतर बाइक सवारों के हैं। पिछले छह महीने में दो हजार से अधिक बाइक जब्त होने के बाद ही यह आलम है कि सड़कों पर हर रोज खून बह रहा है।
जानकारी के अनुसार हाईवे के दो थानों नगरोटा और झज्झर कोटली में इस साल दो सौ से अधिक सड़क हादसों के मामले दर्ज हुए हैं।
इनमें झज्झर कोटली में 58 और नगरोटा में 156 मामले सड़क हादसे के दर्ज हुए। झज्झर कोटली में 58 लोग घायल हुए और 7 लोगों की मौत हो गई।
नगरोटा में 197 लोग घायल हो गए और 30 लोगों की मौत हो गई। हादसे किस कदर बढ़े, इसका अंदाजा यहीं से लगाया जा सकता है कि नगरोटा में कुल दर्ज 299 मामलों में 156 सड़क हादसों के हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि घायल और मरने वालों की औसत आयु 20 से 25 वर्ष के बीच है। पिछले आठ महीने में नगरोटा सब डिवीजन में दो हजार बाइक रश ड्राइविंग करने पर जब्त की गईं।
बावजूद इसके सड़क हादसों का ग्राफ ऊपर चढ़ता गया। पिछले वर्ष की तुलना में दुगने मामले दर्ज हुए। दोनों थानों के अंतर्गत 37 मौतें हुईं हैं, इनमें से 25 मौत हाईवे के शुरू होने के बाद हुई।