चोरों ने शहर के अस्पतालों को चोरी का अड्डा बना लिया है। मोबाइल फोन चोरी होना अस्पतालों में आम बात हो चुकी है। पुलिस ने इस मामले से पल्ला झाड़ते हुए अस्पताल प्रशासन पर बात डाल दी है, जबकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यह काम पुलिस का है।
पुलिस और अस्पताल प्रशासन की तेरे मेरे के चक्कर में अस्पताल आने वाले लोग पिस रहे हैं। शायद ही कोई ऐसा दिन होगा, जब अस्पतालों से मोबाइल फोन चोरी होने की घटना सामने न आई हो। सबसे ज्यादा आतंक मेडिकल कालेज अस्पताल बख्शी नगर में है।
पिछले एक महीने में अस्पताल से तीन दर्जन मोबाइल फोन सहित अन्य सामान चोरी होने की घटनाएं सामने आ चुकी है। पिछले सप्ताह को भी वार्ड नंबर 12 के एक तीमारदार ने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई कि उसका मोबाइल फोन चोरी हो गया। अस्पताल में आए दिन मोबाइल चोरी की घटनाओं को लेकर तीमारदारों में रोष है।
एसएमजीएस, चेस्ट डिजीज, मनोचिकित्सालय एवं अन्य अस्पतालों में भी यही हाल है। यहां आए दिन चोरियां हो रही हैं। मरीजों के तीमारदारों ने चोरियां रोकने के लिए कदम उठाने की मांग की है।
अस्पताल में एक मरीज के साथ दर्जनों तीमारदार आते हैं। अस्पताल में आने जाने का कोई पता नहीं चलता। अस्पताल की अपनी निजी सिक्योरिटी भी है।
अस्पताल प्रशासन को चाहिए कि तीमारदारों पर नियंत्रण करें, चोरियां खुद नियंत्रित हो जाएंगी। पुलिस की सुरक्षा अस्पताल के बाहर है। अंदर की जिम्मेदारी अस्पताल की है। अस्पताल प्रशासन को इसका ध्यान रखना चाहिए।