जम्मू के बहुचर्चित अमरनाथ भूमि आंदोलन 2008 के मामले में आरोप तय करने के समय हाईकोर्ट ने महंत रामेश्वर दास, सोमनाथ डबगोत्रा और विद्या आनंद गिरी को प्रिंसिपल सेशन जज आरएस जैन की अदालत ने केस से डिसचार्ज कर दिया। पुलिस केस के अनुसार 20 सितंबर 2008 को नवाबाद थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह, एएसआई कुलदीप खजूरिया और अन्य पुलिसकर्मी कनाल रोड स्थित अभिनव थिएटर के मेन गेट में तैनात थे।
सुबह नौ बजे संघर्ष समिति के कार्यकर्ता, अन्य राजनीतिक दलों के वर्कर और जम्मू के लोग अभिनव थिएटर में होने वाले कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे। शार्ट सर्किट के कारण पुलिस ने आयोजकों को किसी अन्य स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने को कहा। इसी दौरान रामेश्वर दास, सोमनाथ डबगोत्रा और विद्या आनंद गिरी पांच-छह सौ लोगों के साथ पहुंचे और जबरन थिएटर में घुसे और पुलिस कर्मियों को जान से मारने की धमकी दी।
इस दौरान आरोपी-1 ने पुलिसकर्मियों को जान से मारने की नीयत से उनके ऊपर स्कार्पियो चढ़ाने का प्रयास किया। इसमें कुछ पुलिसकर्मी जख्मी भी हुए। जांच के दौरान पुलिस अधिकारी ने आरोपियों को आरपीसी की धारा 307/34 के तहत दोषी पाया और पांच साल के बाद 12 दिसंबर 2013 को आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद प्रिंसिपल सेशन जज ने विभिन्न मामलों के फैसलों पर गौर करने के दौरान पाया कि आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों की सच्चाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि आरोपी ने स्कार्पियो पुलिसकर्मियों के ऊपर चढ़ाई तो उसमें पुलिसकर्मी सामान्य रूप से जख्मी क्यों हुए।
डाक्टर की रिपोर्ट में भी सामान्य चोट बताया गया है। बहस में यह भी बात सामने आई कि पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों के पथराव में जख्मी हुए थे। तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों को खारिज कर दिया।
जेएनएफ