गन लाइसेंस पहले देना और उसके बाद उसका रिकार्ड मेनटेन रखना तहसीलों और विभागों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
रिकार्ड को अब आन लाइन करने के लिए 31 अक्तूबर तक डिजिटाइजेशन का काम जारी है, लेकिन कुछ गन लाइसेंस का रिकार्ड नहीं मिलने पर उन्हें फर्जी करार दे दिया गया है, इसके साथ ही डीसी आफिस का अमला भी सक्रिय हो गया है।
संदिग्ध लगने वाले मामले भी सीबीआई को भेजे जा रहे हैं। अब तक दस फीसदी लोग अपने फार्म जिला उपायुक्त कार्यालय में जमा कर चुके है।
जम्मू में कुल 15 हजार के करीब लोगों ने गन लाइसेंस लिए हुए हैं, जिनका अब डिजिटाइजेशन किया जा रहा है भविष्य में किसी के लाइसेंस धारक संबंधी जानकारी हासिल करने में ज्यादा परेशानी न हो सके, रिकार्ड आसानी से मिल जाए।
विभाग की ओर से लाइसेंस धारकों का इस रिकार्ड को आन लाइन कर दिया जाएगा, कोई भी उसे देख सकेगा। डीसी आफिस में 1500 के लगभग लोगों ने डिजिटाइजेशन के लिए फार्म जमा करवा दिए हैं।
जिनमें से 550 गन लाइसेंस का रिकार्ड आन लाइन कर दिया गया है, लेकिन इन्हीं में जब कुछ का रिकार्ड नहीं मिला तो उन्हें संदिग्ध मानते हुए वैरीफिकेशन के लिए सीबीआई के पास भेज दिया गया है।
वहां कुछ की रिपोर्ट भी आ रही है। अधिकारिक सूत्रों की माने तो डिजिटाइजेशन के लिए गन लाइसेंस का रिकार्ड मिलना बहुत ही जरूरी है।
उसके बाद ही उसे आन लाइन किया जा सकेगा। संबंधित व्यक्ति का रिकार्ड न मिलने पर प्रक्रिया रोक दी जाएगी। रिकार्ड खंगालने के लिए विभाग को कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है।