जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने रियासती सरकार पर को नोटिस जारी करते हुए अलगाववादी नेता मसर्रत आलम व अन्य के खिलाफ राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के कारण लिए गए एक्शन की रिपोर्ट मांगी है। मसर्रत और आशिया अंद्राबी ने कश्मीर में राष्ट्र विरोधी नारे लगाने और पाकिस्तानी झंडे फहराए थे।
हाईकोर्ट के जस्टिस हसनैन मसूदी और जस्टिस जनक राज कोतवाल की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए सरकार को नोटिस जारी किया और दो सप्ताह के अंदर अदालत में ‘एक्शन रिपोर्ट’ पेश करने को कहा। नोटिस में मीडिया की ओर से जारी गलत खबरों पर भी लिए गए एक्शन के बारे में सरकार से पूछा।
याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट एसएस लहर और आदित्य शर्मा ने दलीलें पेश कीं, जबकि सरकार की ओर से सीनियर एएजी सीमा शेखर उपस्थित थीं। सीनियर एएजी ने रिपोर्ट पेश करने के लिए अदालत से दो सप्ताह का समय मांगा।
खंडपीठ ने सामान्य तौर से पूछा कि सरकार बताए कि गलत ढंग से खबरों को पेश करने के मामले में उन्होंने क्या कदम उठाए, जिससे रियासत की शांति भंग होने के साथ कानून व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है।
याचिकाकर्ता संजय वर्मा और धीरज चौधरी ने याचिका में कहा कि अलगाववादी नेता की रैली में मात्र 150-200 लोग उपस्थित थे, लेकिन समाचार एजेंसियों ने इसे बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जा रहा है। इसमें दिखाया गया कि पूरी रियासत भारत के खिलाफ है। इससे रियासत की शांति भंग हुई। जेएनएफ