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जम्मू कश्मीरः पाकिस्तान की गोलीबारी से ज्यादा सरकार के झूठे वादें दे रहे हैं ग्रामीणों को दर्द

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ceasefire - फोटो : PTI
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अरनिया। पाकिस्तानी गोलाबारी को भले ही एक माह बीत चुका हो, मगर उस गोलाबारी में घायल लोगों का दु:ख दर्द आज भी कम नहीं हुआ है। आज भी यह लोग यहां उस भयानक रात को कोस रहे हैं जब पाकिस्तान ने गोलाबारी की थी। राज्य और केंद्र सरकार के झूठे वादों व पक्षपात पर भी वे आंसू बहा रहे हैं।
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उल्लेखनीय है कि गत माह की 18 जनवरी की रात को पाक ने अचानक गोलाबारी शुरू कर दी थी जो 22 जनवरी तक जारी रही। इस गोलाबारी से क्षेत्र में 14 नागरिक घायल हो गए थे और दो नागरिकों की मौत हो गई थी। सबसे पहले पाक रेंजरों ने कस्बे की वार्ड-13 को निशाना बना कर चार नागरिकों को घायल कर दिया था, जो आज भी उस भयानक रात को कोस रहे हैं।

बिस्तर पर लेटे घायल रमेश लाल (52) का कहना है कि गत माह की 18 तारीख की रात ग्यारह बजे जब हमारे कच्चे मकान पर गोले गिरे तो दो तीन छर्रे मेरे घुटने में लगे। साथ ही मेरी पत्नी चंचला देवी भी इन छर्रे की चपेट में आ गई जो पेट में घुस गए।
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तीन दिन अस्पताल में गुजारने के बाद मुझे छुट्टी दे दी गई और हरे जख्मों को लेकर मैं अपने घर लौट आया। चूंकि जख्म हरे होने से दर्द से अपने होशो हवाश को कायम नहीं रख पा रहा था, जिस पर सरकार की ओर से मिली पांच हजार रुपए की राहत राशि भी कहीं गिर गई। तब से लेकर आज तक मैं इसी चारपाई पर ही लेट कर इलाज करा रहा हूं।
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इलाज की दवाइयां बाहर से लेने को मजबूर हैं ग्रामीण

पत्नी चंचला देवी (50) का कहना था कि करीब एक सप्ताह अस्पताल में रखने के बाद मुझे भी छुटटी दे दी गई और हर वीरवार को ओपीडी में दिखाने को कहा गया। हालांकि एक्सरे में साफ दिख रहा है कि पेट में छर्रे हैं मगर इसके बावजूद मुझे हर वीरवार को ओपीडी में दिखाने के लिए कहा गया, जिसमें मात्र दवाइयां लिखी जाती हैं और सभी दवाइयों को बाहर से लेने के लिए कहा जाता है।

जिससे अब तक हम दोनों की दवाइयों पर काफी खर्च हो चुका है जबकि मेरा पति बिस्तर पर और मैं खुद बीमार रहने से आमदनी का कोई भी जरिया नहीं हो पा रहा है।
घायल रमेश लाल (28) का कहना था कि मेरी टांग में छर्रे लगे थे उपचार के लिए अस्पताल भी पहुंचाया गया, मगर दो दिनों तक पट्टी व अन्य दवाइयां खिलाने के उपरांत मुझे घर भेज दिया गया जबकि जख्म अभी भी नहीं भरे और आज भी मैं अपने पैसे खर्च करके इलाज करा रहा हूं।

उस पर मुझे सरकार की ओर से मिलने वाली पांच हजार रुपये की राहत राशि भी नहीं दी गई। दर्शन लाल (60) का कहना है कि मैं टांग व बाजू में छर्रे लगने से काफी घायल हो गया था, जिस पर उपचार के करीब चार पांच दिनों के बाद मुझे छुट्टी दे दी गई और उसके बाद जो पांच हजार मुझे राहत राशि मिली थी उन पैसों से उपचार कराने के बावजूद भी अपने पैसों को खर्च करना पड़ रहा है।

हालांकि एक माह बीत जाने के बाद भी मैं पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाया हूं, मगर आमदनी का कोई अन्य साधन न होने पर किसी तरह मजदूरी करके अपने परिवार का पेट भर रहा हूं। सभी घायलों के अनुसार आज तक न तो सरकार ने हमारी कोई सुध ली और न ही किसी नेता मंत्री ने हमारा हाल जानने का प्रयास किया जबकि हम अपना उपचार कराते-कराते लगभग खाली हो चुके हैं।
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