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रसाना कांड

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जम्मू। रसाना कांड में फोरेंसिक लैब और क्राइम ब्रांच की टीम द्वारा 10 दिन बाद आरोपी और नाबालिग के बाल जमा करने की रिपोर्ट शक के दायरे में है। यहां तक कि आरोपी को पकड़े जाने के बाद घटनास्थल से उसके बाल बरामद किए जाने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। नाबालिग को इंसाफ दिलाने में देरी की आशंका जताई रही है। सही रिपोर्ट और निष्पक्ष जांच से ही पीड़ित लड़की को इंसाफ दिलाए जाने की मांग बार एसोसिएशन और सिविल सोसायटी के लोगों ने उठाई है।
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ड्यूटी मजिस्ट्रेट के साथ घटनास्थल पर जाकर दो रिपोर्ट के आधार पर क्राइम ब्रांच ने कई सबूत जमा करने की रिपोर्ट चालान में पेश की थी। इस पर कानूनी विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। कूटा के ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने घटनास्थल (देवस्थान) पर दो बार क्राइम ब्रांच की टीम के साथ सबूतों को जमा किया था। ड्यूटी मजिस्ट्रेट पवन शर्मा की दो फरवरी 2018 की रिपोर्ट के अनुसार नाबालिग के बाल, गले के हार का नीले रंग का हेड, कुछ छड़ी, मिट्टी और खून के धब्बों को सीज किया। उनके साथ क्षेत्र के गिरदावर प्रदीप कुमार, पटवारी मंजूर अहमद भी मौजूद थे। क्र्राइम ब्र्रांच ने सीजर मेमो तैयार किया।
इसके बाद पांच फरवरी को क्राइम ब्रांच की टीम का दोबारा फोन आया। छह फरवरी को टीम के साथ ड्यूटी मजिस्ट्रेट दोबारा घटनास्थल पर पहुंचे। देवस्थान पर जाकर दोबारा जांच की। करीब 133 मीटर दूर एक पुली के नीचे की भी जांच की। पुली से भी कुछ छड़ी और अन्य सामान भी बरामद किया। जबकि पुलिस के एएसपी सांबा नवीद पीरजादा ने 27 जनवरी को घटनास्थल पर पहले से ही दौरा करके छानबीन कर दी थी। नवीद को आईजीपी जम्मू के आदेश पर सिट का इंचार्ज बनाया गया था। नाबालिग के शव को 17 जनवरी के बाद रिकवर करने के बाद दस दिन बाद बाल, खून के धब्बे, गले के हार का हेड, सांझीराम के घर से लकड़ी की हत्थी से तैयार लोहे की राड बरामद की। बाल को नाबालिग और आरोपी के बाल को मिलाया गया। नई दिल्ली स्थित फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट आई। इसमें बताया गया कि बाल से दोनों के होने की पुष्टि की गई। बरामद करने से पहले मुख्य आरोपी को 19 जनवरी को ही पकड़ लिया गया था।
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब मुख्य आरोपी पुलिस गिरफ्त में था तो उसके बाल मौका ए वारदात पर डाल दिए गए होंगे। इसके बाद दूसरी बार क्राइम ब्रांच की टीम ड्यूटी मजिस्ट्रेट को दोबारा मौका ए वारदात पर ले गई और सीजर मेमो तैयार किया।

दो बार बदली गई जांच टीम
पुलिस की टीम दो बार बदली गई। कांस्टेबल, दो एसपीओ को सस्पेंड कर दिया गया। एएसपी सांबा नवीद ने मौके पर जाकर जांच की। क्राइम ब्रांच के एसएसपी रमेश जाला को तैनात करने के बाद बदला और दोबारा उन्हें तैनात कर दिया। टीम की जांच में सांबा और कठुआ के दो पब्लिक प्रोसेक्यूटर को तैनात करने से जांच शक के दायरे में आई है। वन मंत्री चौ लाल सिंह का कहना है कि कि इस मामले की जांच सही से नहीं हो रही है और लोगों की सीबीआई जांच की मांग का समर्थन किया।

केस की जांच में कई कमियां : बार
बार एसोसिएशन के उपप्रधान एडवोकेट सचिन गुप्ता और मुनीष चोपड़ा के अनुसार क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट शक पैदा कर रही है। नाबालिग को इंसाफ दिलाने के बजाय केस उलझाया गया है। इंसाफ दिलाने के लिए जांच सही करना क्र्राइम ब्रांच का फर्ज बनता था। शक के दायरे में पहले से आई क्राइम ब्रांच से केस को सीबीआई को देने की मांग की गई थी। इस चालान पर केस चलेगा तो सही आरोपियों को सजा नहीं मिल पाएगी। केवल मामले के राजनीति रोटियां सेंकने के लिए भाजपा और पीडीपी ने इस मुद्दे को हवा देकर मासूम लड़की से और अत्याचार किया है। उसे इंसाफ दिलाने के लिए ही वकील ने आंदोलन किया है।
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