गर्भवती महिला से सामूहिक दुष्कर्म पर सजा के खिलाफ अपील पर हाईकोर्ट ने अदालत के फैसले को सही माना है। हाईकोर्ट में जस्टिस मोहम्मद याकूब मीर और जस्टिस ताशी राबस्तन की डिवीजन बेंच ने कहा, इस मामले में अदालत ने जो फैसला दिया है, उसमें कहीं पर भी कानून नहीं टूटा है।
लिहाजा बेंच इस फैसले को बरकरार रखती है। कोर्ट ने साथ ही कहा, 26 मई 2015 को दिए गए फैसले के मुताबिक धारा 376 के तहत न्यूनतम सजा दस वर्ष होनी चाहिए। वहीं इसे अधिकतम चौदह वर्ष तक किया जा सकता है। आदेश में संशोधन करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा, दोषी साबित हुए आरोपियों को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी जाती है।
शिकायत के अनुसार मामला 22 और 23 अगस्त 2008 का है। पीड़िता अपने घर में सो रही थी। बेलीचराना इलाके में उसके घर पर सुबह तीन बजे दाउद खान और राजीव कुमार घुस आए। आठवें महीने के गर्भ की दुहाई के बावजूद दोनों ने उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। सतवारी पुलिस थाने में मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की गई थी।