भारतीय न्याय संहिता के नए कानून में पुलिस की इस तरह की पहली कार्रवाई, जज ने सुनाई सामुदायिक सेवा की सजा
आईपीसी में अधिकतम 24 घंटे की सजा और जुर्माने का था प्रावधान
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शराब पीकर हंगामा करने पर अब हवालात की जगह पूरा हफ्ता सार्वजनिक स्थानों की सफाई करनी पड़ सकती है। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस ) में बनाए नए कानून में इसका प्रावधान है। जिसका पहला मामला भी सामने आ गया है। जम्मू एक स्थानीय अदालत ने झज्जर कोटली में शराब पीकर हंगामा करने वाले दो व्यक्तियों को ऐसी ही सजा सुनाई है। इनमें एक को झज्जर कोटली की पार्क तो दूसरे को डंसाल स्वास्थ्य केंद्र की पूरा हफ्ता सफाई करने की सजा सुनाई।
बुधवार 22 जनवरी पुलिस ने पप्पू और अनुज कुमार को नशे में धुत होकर उत्पात मचाने पर गिरफ्तार किया। इनके खिलाफ पुलिस ने बीएनएस की धारा 355 में मामला दर्ज किया। इससे पहले इस तरह का अपराध करने पर आईपीसी की धारा 510 में मामला दर्ज होता था। जिसमें पुलिस ने आरोपी को अदालत के समक्ष पेश करती थी। इसमें आरोपी को 24 घंटे हवालात में रखने और जुर्माने का प्रावधान था। अब बीएनएस में इस अपराध के करने पर एक हजार रुपये का जुर्माना और सार्वजनिक सेवा का भी प्रावधान है। पुलिस ने जब दोनों को जम्मू के तृतीय अतिरिक्त मुंसिफ कोर्ट में पेश किया तो जज ने दोनों को पारंपरिक सजा के बजाए सार्वजनिक सेवा की सजा सुनाई। पप्पू को एक सप्ताह तक रोजाना सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक झज्जर कोटली सार्वजनिक पार्क में काम करने का निर्देश दिया गया । जबकि अनुज कुमार सुबह 9 से दोपहर 12 तक डंसाल स्वास्थ्य केंद्र में सामुदायिक सेवा करने का आदेश दिया।
अब सजा की जगह सुधार
झज्जर कोटली के थाना प्रभारी निशांत गुप्ता का कहना है कि नए आपराधिक कानूनों के तहत ये प्रावधान छोटे अपराधों के लिए पुनर्वास और सामुदायिक सहभागिता पर जोर देता है। जो सजा के बजाय सुधार को बढ़ावा देता है। हमारा ये प्रयास सार्वजनिक अपराधों में बदलाव लाना है। जो भविष्य में इसी तरह के मामलों के लिए अहम भूमिका निभाएगा।