आरोप है कि पांचवीं कक्षा की 14 वर्षीय छात्रा के स्कूल शिक्षक ने कई महीनों तक उसका शारीरिक शोषण किया, जिससे वह गर्भवती हो गई। बताया जाता है कि वह सात माह की गर्भवती थी। 10 अगस्त को तबीयत बिगड़ने के बाद उसके स्वजन उसे पीएचसी छात्रू ले गए थे। यहां से जिला अस्पताल किश्तवाड़ ले जाया गया। 20 अगस्त को गर्भपात कराने की प्रक्रिया के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद मामले ने गंभीर तूल पकड़ लिया था। परिवार और स्थानीय लोग घटना में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें कड़ी सजा देने की मांग कर रहे हैं।
मामले की जांच के लिए किश्तवाड़ पुलिस ने पहले ही एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी अब तक मुख्य आरोपी शिक्षक एवं स्कूल का हेडमास्टर खालिद हुसैन, उसके भाई तारिक हुसैन, किश्तवाड़ जिला अस्पताल का सफाई कर्मी फारूक अहमद और नर्स सोनिका समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस छात्रा से दुष्कर्म से लेकर उसकी मौत तक जुड़े सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है।
अब केस को क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर करने का यह फैसला निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसमें छात्रू से लेकर किश्तवाड़ जिला अस्पताल तक के कर्मचारियों की भूमिका की जांच होगी। क्राइम ब्रांच की आईजी सारा रिजवी ने पुष्टि की है कि एजेंसी को पुलिस हेडक्वार्टर से मामला ट्रांसफर होने की जानकारी मिल गई है और वे केस को अपने हाथ में लेने की प्रक्रिया में हैं।
दुष्कर्म से गर्भपात तक 70 लोगों का हाथ होने का संदेह
छात्रा से दुष्कर्म से लेकर गर्भपात तक के पूरे घटनाक्रम में 70 से अधिक लोगों की भूमिका होने का संदेह जताया जा रहा है। ऐसे में क्राइम ब्रांच पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ेगी। अब तक सामने आए तथ्यों और सबूतों की नए सिरे से समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
डीआईजी ने एसआईटी से जानी जांच की प्रगति
डोडा-किश्तवाड़-रामबन रेंज की डीआईजी सरगुन शुक्ला शनिवार को किश्तवाड़ पहुंचीं। उन्होंने एसआईटी सदस्यों के साथ बैठक कर अब तक हुई जांच की समीक्षा की। इस दौरान गिरफ्तार किए गए आरोपियों और उनके खिलाफ हुई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी ली गई। उन्होंने एसआईटी को निर्देश दिया कि वे आगे की जांच में क्राइम ब्रांच का पूरा सहयोग करें।
पिता की याचिका पर हाईकोर्ट में कल होगी सुनवाई
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट सोमवार को नाबालिग से दुष्कर्म और गर्भपात के दौरान हुई मौत के मामले में पीड़िता के पिता की याचिका पर सुनवाई करेगा। शनिवार को वरिष्ठ अधिवक्ता दीपिका पुष्कर नाथ की ओर से दायर इस याचिका में पूरे घटनाक्रम की क्राइम ब्रांच या किसी स्वतंत्र एजेंसी से गहन जांच की मांग की गई है।
याचिका में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बताया गया है कि नाबालिग के गर्भवती होने का पता चलने पर मुख्य आरोपी के करीबियों ने कथित तौर पर एक पंचायत बुलाई थी। इसमें मामले में समझौते के लिए पिता पर भारी दबाव डाला गया, उन्हें धमकाया गया और पैसों की पेशकश की गई। आरोप है कि दबाव में पिता से एक सादे कागज पर अंगूठे का निशान भी ले लिया गया। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि मामले को रफा-दफा करने की कोशिश करने वालों, पंचायत में मौजूद सभी लोगों की पहचान, दबाव में सादे कागज पर अंगूठा लगवाने की परिस्थितियों और पैसों के स्रोत की निष्पक्ष व कड़ी जांच होनी चाहिए। पीड़ित पिता ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपने की भी मांग की थी।
आरोप : शराब और पैसों के लालच में आरोपियों से मिला अस्पताल कर्मी
छात्रू में नाबालिग के साथ दुष्कर्म और मौत मामले में जिला अस्पताल में तैनात सफाई कर्मचारी की सेवाएं पहले ही समाप्त की जा चुकी हैं और एसआईटी उसे गिरफ्तार भी कर चुकी है। जांच में सामने आया है कि सफाई कर्मचारी ने शराब की एक बोतल और चंद पैसों के लालच में आरोपियों की मदद की थी। उस पर नाबालिग का गर्भपात कराने में भी सहयोग करने का आरोप है।
जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी सफाई कर्मचारी नाबालिग को अपने साथ एक नर्स से मिलवाने के लिए ले गया था, जिसके बाद उसे कुछ दवाइयां दी गईं। इससे छात्रा को भारी रक्तस्राव शुरू हो गया। पूरे घटनाक्रम में अस्पताल से जुड़े अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस सभी तथ्यों और संदिग्धों के बीच कनेक्शन खंगाल रही है, जिससे आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
आखिर किन-किन लोगों की रही भूमिका?
छात्रू से लेकर किश्तवाड़ जिला अस्पताल तक कुछ लोगों की भूमिका पहले से ही संदेह और जांच के दायरे में है। अब क्राइम ब्रांच गहराई से यह पता लगाएगी कि नाबालिग तक आरोपियों की पहुंच बनाने, उसे अस्पताल ले जाने और गर्भपात से जुड़ी दवाइयां उपलब्ध कराने में किस-किस का हाथ रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे नेटवर्क और जिम्मेदार लोगों की असली तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।