वर्ष 2014 में सेरीकल्चर विभाग के सहयोग से छह हजार से ज्यादा कीट पालकों ने लगातार दूसरी बार कोकून मंडी में चार करोड़ की कोकून बेचने की उपलब्धि हासिल की है।
खराब मौसम के चलते इसकी उम्मीद कीट पालकों या सेरीकल्चर विभाग ने भी नहीं की थी। कोकून के उम्मीद से भी ज्यादा दाम मिलने पर इस बार कीट पालक मुस्कान लेकर अपने घरों को लौटे हैं।
उधमपुर में तैयार होने वाली गुणवत्ता भरी कोकून की पूरे भारत में जबरदस्त मांग है। वर्ष 2010 में 4981 कीट पालकों ने सेरीकल्चर विभाग के सहयोग से 1 लाख 41 हजार किलो हरी कोकून का उत्पादन किया था, जिसकी कीमत 2 करोड़ 21 लाख, 33 हजार रुपये रही।
कब -कब कितना रहा सेलिंग रिकार्ड
2010 में अच्छे दाम मिलने के बाद 2011 में कीट पालकों की संख्या बढ़कर 5427 पहुंच गई। 2011 में 5427 कीट पालकों ने 1 लाख 83 हजार 400 किलो कोकून का उत्पादन किया।
इस वर्ष दाम 2010 के मुकाबले में काफी कम मिले। 2011 में कोकून के दाम 1 करोड़ 94 लाख 22 हजार 600 रुपये मिले। इस वर्ष कीट पालक काफी मायूस होकर अपने घरों को लौटे।
लेकिन, 2012 में कीट पालकों को कोकून के अच्छे दाम मिलने पर मुस्कान वापस लौट आई। वर्ष 2012 में जिले में 5650 कीट पालकों ने 1 लाख 74 हजार किलो कोकून का उत्पादन किया, जिसके दाम कीट पालकों को 2 करोड़ 31 लाख रुपये मिले।
2012 तक 2 करोड़ 31 लाख रुपये की कीमत जिले की सबसे अधिक कीमत थी। 2013 में कीट पालकों की मेहनत ने सारे रिकार्ड तोड़ते हुए 4 करोड़ 13 लाख रुपये का जादुई आंकड़ा छुआ। 2014 में भी एक नया कीर्तिमान बनने की उम्मीद बनी हुई है।
1.84 लाख किलो कोकून बेची
वर्ष 2014 में पहली मंडी में जिले के विभिन्न हिस्सों से 6252 कीट पालक कोकून बेचने के लिए पहुंचे। इन किसानों ने मंडी में 1 लाख 84 हजार किलो कोकून बेची।
किसानों को इस कोकून के चार करोड़ रुपये दाम मिले हैं। मंडी में कोकून का अधिकतम दाम 1001 रुपये प्रति किलो रहा। जबकि औसत दाम 696 रुपये प्रति किलो रहा है।
अभी 2014 की दूसरी मंडी लगना बाकी है। दूसरी मंडी के बाद कीमत व उत्पादन की संख्या में और अधिक बढ़ोतरी होगी और यह एक नया रिकार्ड बन सकता है।
इस बार खराब मौसम के कारण काफी कीट पालकों के कीट मारे गए थे। अगर ऐसा नहीं होता तो पहली मंडी में यह आंकड़ा साढ़े चार करोड़ तक पहुंच सकता था।