जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से जुड़े एक मामले में पुलिस की ढुलमुल जांच पर अदालत ने कड़ी फटकार लगाकर चालान ही लौटा दिया। अदालत ने जांच अधिकारी की काबिलियत और मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, आतंकवाद ग्रस्त राज्य में भी यदि मामले की निष्पक्ष जांच करने के बजाए पुलिस केवल अपने मन मुताबिक काम पर उतर आए तो समाज को क्या संदेश जाएगा।
चालान लौटाते हुए अदालत ने एसएसपी रामबन को नए सिरे से जांच करने के आदेश जारी किए। साथ ही पुलिस महानिदेशक को आदेश की प्रति भेजकर दोषी अधिकारियों से जवाब तलब करने का अनुरोध किया।
अदालत ने कहा, पुलिस महानिदेशक को मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी जांच की मानीटरिंग करवानी चाहिए। रामबन जिले के उखड़ाल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रेम सागर की अदालत में एसएचओ रामसू द्वारा चालान पेश किया गया।
अभियोजन ने फाइल को अच्छे से जांचने की ही जहमत नहीं उठाई: कोर्ट
कोर्ट
- फोटो : डेमो फोटो
अदालत ने पाया कि थाना प्रभारी आरोपी अब्दुल लतीफ के साथ पेश हुए हैं। दूसरा आरोपी सलमान खान फरार बताया गया है। कोर्ट ने पाया कि हिजबुल मुजाहिदीन के कथित ओवर ग्राउंड वर्कर संबंधी मामले में जांच अधिकारी ने आरोपी को अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट (उलफा) की धारा 13, 17 और 21 के चार्ज से बाहर कर दिया है।
इसके लिए पुलिस ने महज इतनी ही वजह बताई है कि आरोपी ने पुलिस द्वारा जब्त किए गए वायरलेस सेट का इस्तेमाल नहीं किया है। केवल वायरलेस सेट पास होने भर से चार्ज नहीं लगाया जा सकता। अदालत ने कहा, सीडी फाइल को कई मर्तबा जमा करवाया जा चुका है लेकिन हर बार कोई न कोई खामी के साथ इसे फिर पेश कर दिया जाता है। इ
इससे साफ होता है कि अभियोजन पक्ष जांच की खामी को दूर करने में रुचि ही नहीं रखता। वरिष्ठ अफसरों को अंधेरे में रखकर अपने स्तर पर ही आरोपी को संगीन अपराध के चार्ज से बाहर कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा, अभियोजन की एक अन्य दलील है जिसमें कहा गया है कि जिन आतंकियों के लिए काम करने का आरोप है, वे मारे जा चुके हैं।
ऐसे में उल्फा के चार्ज नहीं बनाए जा सकते। अदालत ने कहा, असल में अभियोजन ने फाइल को अच्छे से जांचने की ही जहमत नहीं उठाई। गवाहों के बयानों से साफ होता है कि आरोपी का हिजबुल मुजाहिदीन के साथ सीधा संपर्क था। इस सब के बावजूद चार्ज हटाना हैरत में डालने वाला है।