राज्य की सड़कों की खस्ता हालत पर हाईकोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव और अन्य को इस संदर्भ में चार हफ्तों के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसमें जवाब दिया जाएगा कि सड़कों की हालत ऐसी क्यों है। कोर्ट में दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य के हाईकोर्ट के जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर और जस्टिस जनक राज कोतवाल वाली खंडपीठ ने सोमवार को इसके निर्देश दिए।
मुख्य सचिव के साथ लोक निर्माण विभाग के आयुक्त सचिव, दोनों संभागों के मंडलायुक्तों, जम्मू और श्रीनगर के नगर निगम आयुक्तों और पीएचई के आयुक्त सचिव से भी जवाब मांगा गया है। एडवोकेट जसविंदर सिंह की ओर से कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। इसमें उन्होंने कहा कि राज्य की सड़कों की हालत काफी खराब है। इनमें ग्रामीण इलाकों की सड़कें ज्यादा खराब हैं। सड़कों पर जगह-जगह गढ्ढे पड़े हुए हैं। इनको सही तरह से लेबल नहीं किया गया और न सही तरह से बनाया गया है।
मौजूदा सड़कों में न तो फुटपाथ बनाए गए हैं। सड़कों की दयनीय हालत का लाभ उठाकर अतिक्रमण किया गया है। सड़कों की मरम्मत और निर्माण में सही तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया गया है, इसकी वजह से इनकी यह हालत हो चुकी है, जबकि सही सामग्री भी इस्तेमाल नहीं की गई। ऐसे में सरकार को जवाब देना चाहिए कि सड़कों की हालत ऐसी क्यों है। खंडपीठ ने चार हफ्तों के भीतर इसे लेकर जवाब देने के निर्देश जारी किए हैं। जेएनएफ