केएएस की विभिन्न श्रेणियों में याचिकाकर्ताओं को नियुक्त करने के रिट कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को चुनौती देने वाली तीन एलपीए को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने खारिज कर दिया। चीफ जस्टिस एमएम कुमार और जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने रिट कोर्ट के फैसले को बनाए रखा और सरकार की तीनों एलपीए को रद कर दिया।
मामले की सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने पाया कि तीनों मामले रिट कोर्ट द्वारा आठ अगस्त 2013 को दिए गए फैसले को चुनौती देने वाली हैं। विभिन्न सिविल पदों के लिए पब्लिक सर्विस कमीशन ने संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा का आयोजन किया। चुने गए प्रतियोगियों को केएएस, जेएंडके एकाउंट्स और जेएंडके पुलिस में नियुक्त किया जाना था।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में याचिका दायर करते हुए कहा कि कुछ चयनित लोगों के ज्वाइन न करने पर कुछ पद खाली बच गए थे। मेरिट के आधार पर उन्हें खाली पदों पर नियुक्त किया जाना चाहिए।
अपील पर सुनवाई करते हुए रिट कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि याचिकाकर्ताओं को खाली पदों पर नियुक्त किया जाए। सरकार द्वारा रिट कोर्ट के आदेश को चुनौती दिए जाने की याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने भी कहा कि खाली पदों पर याचिकाकर्ताओं को नियुक्त किया जाना चाहिए।
जबकि सरकार के सीनियर एएजी गगन बसोत्रा का कहना था कि संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में वेटिंग लिस्ट का कोई प्रावधान नहीं है। खंडपीठ ने कहा कि आयोग का अनुमोदन एक साल तक रहता है और इसकी सूचना सरकार को भी दी जाती है। इसे छह माह के लिए आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
आयोग को अपने अनुमोदन के साथ वेटिंग लिस्ट भी सरकार को सौंपी जानी चाहिए थी। तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए खंडपीठ ने सरकार की तीनों एलपीए खारिज कर दीं।