बहुचर्चित एनआईटी मामले की जनहित याचिका का निपटारा करते हुए जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने प्रशासन को स्थानीय एवं गैर स्थानीय छात्रों को सुरक्षा प्रदान के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश एनपाल बसंथा कुमार और न्यायाधीश धीरज सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने पाया कि जनहित याचिका में की गई प्रार्थना पर फैसला देने की जरूरत नहीं है।
जो अथारिटी प्रशासन चला रही है, यह उसकी जिम्मेदारी बनती है कि वह स्थानीय एवं गैर स्थानीय छात्रों को सुरक्षा प्रदान करे। कोर्ट में 25 अप्रैल 2016 को पेश की गई अपील पर गौर किया गया। इस अपील में एनआईटी श्रीनगर को शिफ्ट करने, छात्रों को सुरक्षा प्रदान करने, बेखौफ कैंपस में आने-जाने, जो छात्रों परीक्षा नहीं दे पाए हैं, उन छात्रों की परीक्षा लेने की प्रार्थना की गई थी।
खंडपीठ ने पाया अपील में इस प्रार्थना को लेकर कोई भी संबंधित प्रशासन से संपर्क कर सकता है। खंडपीठ के समक्ष एडवोकेट जनरल डीसी रैना ने एनआईटी श्रीनगर के रजिस्ट्रार की स्टेटस रिपोर्ट पेश की। स्टे्टस रिपोर्ट मेें कहा गया आरईसी श्रीनगर को एनआईटी श्रीनगर मेें तब्दील किया गया। आरईसी श्रीनगर की स्थापना 1960 में की गई थी। एनआईटी में प्रवेश आल इंडिया स्तर पर हुई प्रवेश परीक्षा के तहत किया गया।
जम्मू कश्मीर से 50 फीसदी और अन्य राज्यों से 50 फीसदी छात्रों को प्रवेश दिया गया। भारत सरकार के प्रावधानों के तहत ही उच्च शिक्षा में आरक्षण दिया गया है। इंस्टीट्यूट में 2671 कुल छात्र हैं। इसमें 2260 बीटेक, 258 एमटेक और 153 पीएचडी स्कालर हैं। इसमें 199 लड़कियां हैं। जम्मू कश्मीर के बीटेक में 1099, एमटेक के 124, पीएचडी के 138 छात्र हैं। अन्य राज्यों से बीटेक के 1152, एमटेक के 134, पीएचडी के 15 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
एनआईटी श्रीनगर के रजिस्ट्रार की स्टेटस रिपोर्ट पेश
एनआईटी श्रीनगर
- फोटो : Amar Ujala
इंस्टीट्यूट में 25 फरवरी 2016 से लेकर अप्रैल 2016 तक माहौल शांत था। सामान्य क्लासें 4 अप्रैल 2016 से शुरू हुई। गैर स्थानीय छात्रों की अधिकतर संख्या ने दूसरे, चौथे और छठे सेमेस्टर की क्लासों में कम पहुंचे। इसके उपरांत 11 अप्रैल 2016 से 16 अप्रैल 2016 में माइनर वन परीक्षाएं हुईं। करीब 1200 गैर राज्य के छात्र अपने गृह राज्य में चले गए थे।
सभी छात्र इन परीक्षा में नहीं बैठ सके। हालात तब भी सामान्य थे। प्रशासन ने 1200 गैर स्थानीय छात्रों के लिए माइनर वन परीक्षा की 5 मई से 8 मई तक दोेबारा तारीखें निकाली। इस बीच, 25 अप्रैल से 441 गैर स्थानीय छात्र क्लास में आने लगे। जिसमें 90 लड़कियां भी शामिल थी।
दिसंबर 15 से लेकर अप्रैल तक स्थानीय और गैर स्थानीय छात्र आपस में प्रेम भाव से रहतेे थे और बाहरी राज्यों में कई खेल प्रतियोगिताओं में भाग लिया। सभी छात्रों से बच्चों की तरह व्यवहार किया जाता रहा और कालेज प्रधायक आगे भी ऐसा अपना व्यवहार रखेंगे।
खंडपीठ स्टेट्स रिपोर्ट पर गौर किया और पाया 441 गैर स्थानीय छात्र, जिसमें 90 लड़कियां भी शामिल हैं वह 25 अप्रैल तक क्लासों में मौजूद हैं। तो अन्य छात्र भी एनआईटी श्रीनगर पहुंचकर अपनी शिक्षा शुरू कर सकते हैं। जो छात्र माइनर वन परीक्षा नहीं दे सके, उनके लिए 5 मई से 8 मई की दोबारा परीक्षा तारीख रखी गई है।
सुरक्षा के अलावा अन्य सभी प्रार्थना पर खंडपीठ जरूरत नहीं समझता कि इस पर कोई प्रतिक्रिया दे और जनहित का निपटारा कर दिया। एडवोकेट बीएस सलाथिय्रा, एडवोकेट रविंद्र शर्मा जनहित याचिका की तरफ से पेश हुए।