- पुलवामा की अदालत ने सुनाया फैसला, पांपोर में 2011 में हुई थी युवक की हत्या
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। पुलवामा की अदालत ने पांपोर में 2011 में 21 वर्षीय युवक की हत्या के दो दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। शनिवार को 11 साल पुराने मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश नासिर अहमद डार ने यूनिस अहमद डार और जावेद अहमद भट निवासी नौगाम को युवक कालीम कादरी की हत्या का दोषी ठहराया। इन लोगों ने एक करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की थी।
अदालत ने दोषियों को 302 आरपीसी के तहत आजीवन कारावास और 364 आरपीसी के तहत अपहरण के लिए सात वर्ष की कठोर कैद की सजा सुनाई। अदालत ने दोषियों को 387 आरपीसी के तहत फिरौती के लिए पांच वर्ष की साधारण कैद की सजा सुनाई। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। हत्या के वक्त युवक की उम्र करीब 21 वर्ष थी और वह पढ़ाई कर रहा था। माता-पिता का इकलौता बेटा था। अदालत ने कहा, युवक के माता-पिता पीड़ित हैं। किसी भी मुआवजे से हुए नुकसान की मरम्मत नहीं की जा सकती है। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय का हवाला दिया, जिसमें मुआवजे को न्यायसंगत सजा का एक अभिन्न अंग माना गया है।
इस मामले में दोषी पिछले 12 वर्षों से अधिक समय से सलाखों के पीछे हैं और लंबे समय तक कारावास का उनके सामाजिक और आर्थिक स्तर पर प्रभाव पड़ता है, ऐसी स्थिति में, दोषियों को पीड़ित को जुर्माना या मुआवजा देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है, लेकिन जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा तैयार की गई पीड़ित मुआवजा योजना, 2013 के तहत पीड़ित को मुआवजा दिया जा सकता है। अदालत ने कहा, घटना 28 अक्तूबर 2011 को हुई थी। सदस्य सचिव जेएंडके लीगल सर्विसेज अथॉरिटी रुपये की राशि जारी करेंगे। मृतक के माता-पिता को मुआवजे के रूप में 3.00 लाख रुपए दिए जाएं।