जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने रिश्वत मामले में सबूतों की कमी की वजह से पटवारी को बरी कर दिया। उसे 20 साल पहले भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराया गया था। क्रिमिनल अपील को मंजूरी देते हुए जस्टिस संजय परिहार ने 2004 में दी गई सजा को भी रद्द कर दिया।
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अपीलकर्ता को जम्मू-कश्मीर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट और सेक्शन 161 आरपीसी के तहत कड़ी कैद और जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ पैसों की रिकवरी और फिनोलफथेलिन टेस्ट का पॉजिटिव आना सजा को बनाए रखने के लिए काफी नहीं हैं, जब तक कि अभियोजन पक्के तौर पर यह साबित न कर दे कि उसने रिश्वत की मांग की थी।
मुख्य गवाह बयान से पलट गया और उसने भुगतान करने या रिश्वत की मांग से इनकार कर दिया। सभी सबूतों पर दोबारा गौर करते हुए हाईकोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट ने कानूनी तौर पर मंजूर सबूत के बिना आरोपी के खिलाफ अंदाजा लगाने में गलती की। जेएनएफ