- कैसे खतरा होगा, इसका सबूत पेश नहीं कर पाया याची
कोर्ट ने कहा - अदालत का समय बर्बाद किया
जम्मू। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने जनहित याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता पर 10 हजार का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने याचिका को बेतुका बताते हुए कहा कि इससे अदालत और उसके संसाधनों का वक्त बर्बाद किया गया है। प्रेस कोर काउंसिल की तरफ से इंदू भूषण बाली ने याचिका दायर की थी। इसमें एक सैन्य प्रतिष्ठान के नजदीक बन रही अस्पताल की इमारत के निर्माण को सेना की सुरक्षा के लिए खतरा बताया।
न्यायाधीश अतुल श्रीधरन एवं राजेश सेखरी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ने यह प्रदर्शित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किया है कि अस्पताल का निर्माण सैन्य प्रतिष्ठान के लिए कैसे खतरा पैदा कर सकता है। आतंकियों और अन्य गैरकानूनी तत्वों की ओर से अस्पताल का उपयोग करने से संबंधित दावे विश्वसनीय हैं, लेकिन बात यह है कि इस तरह की आपत्ति उठाने के लिए सबसे उपयुक्त संस्था सेना ही है।
याचिका में चिंता जताई गई थी कि जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से सेना की चहारदीवारी के 100 मीटर के भीतर अस्पताल का निर्माण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है। खंडपीठ ने कहा कि इन तर्कों में कोई दम नहीं है। लिहाजा याचिकाकर्ता सेना कल्याण कोष में 10 हजार रुपये का भुगतान करे। इस आदेश के साथ याचिका खारिज कर दी गई। जेएनएफ