अग्निशमन नीति लागू न होने पर जताई गंभीर चिंता, अगली सुनवाई 17 नवंबर को
जेएनएफ
जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने राज्य में अग्निशमन नीति (फायर सेफ्टी पॉलिसी) लागू न होने पर गहरी चिंता जताई है। चीफ जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस यशपॉल बोर्नी की डिवीजन बेंच ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि आग के जोखिम से निपटने की असल तैयारी क्या है? कोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिया है कि वह हलफनामा दायर कर बताए कि प्रदेश में इस समय कितने फायर स्टेशन काम कर रहे हैं, कितनों की जरूरत है और आग के खतरे के लिहाज से इलाकों की क्या स्थिति है। अगली सुनवाई 17 नवंबर को है।
यह आदेश वकील मोहम्मद रहूफ खान की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदेश में फायर सेफ्टी नियमों को जमीन पर न उतारे जाने से आम जनता की जान-माल हर वक्त खतरे में रहती है। खास तौर पर उन इलाकों में हालात बेहद खराब हैं, जहां आग लगने पर तुरंत मदद पहुंचने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।
अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि यह जांचना जरूरी है कि राज्य का मौजूदा ढांचा राष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरता भी है या नहीं। हाईकोर्ट ने प्रशासन से पूछा कि जोखिम के आधार पर बांटे गए इलाकों की कुल संख्या कितनी है? तय नियमों के मुताबिक हर इलाके में कितने अग्निशमन केंद्र होने चाहिए और हकीकत में कितने स्टेशन सक्रिय हैं?
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता मोनिका कोहली ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की स्टैंडिंग फायर एडवाइजरी काउंसिल के नियमों का हवाला दिया। कोर्ट ने अब पूरी वस्तुस्थिति का विस्तृत ब्योरा तलब किया है।
सरकार ने कहा...रिस्पॉन्स टाइम और आबादी तय करती है फायर स्टेशनों का पैमाना
अदालत में वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया कि कहीं भी फायर स्टेशन स्थापित करने का फैसला आबादी, भौगोलिक स्थिति, आग के संभावित खतरे और घटनास्थल तक पहुंचने के समय पर निर्भर करता है। दिशा-निर्देशों के तहत इलाकों को चार श्रेणियों अत्यधिक जोखिम, मध्यम जोखिम, कम जोखिम और ग्रामीण या कम संवेदनशील क्षेत्र में बांटा गया है।
-उन्होंने बताया कि यह उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में 3 मिनट, मध्यम और कम जोखिम वाले शहरी क्षेत्रों में 5 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 20 मिनट रखा गया है। इसके अलावा, स्थानीय जरूरतों के आधार पर औसतन शहरी इलाकों में हर 10 वर्ग किलोमीटर और ग्रामीण इलाकों में हर 50 वर्ग किलोमीटर के दायरे में एक फायर स्टेशन होना जरूरी है।