जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने 10 साल पहले दोहरी एमआरपी से जुड़े एक मामले में हिंदुस्तान कोका कोला बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि 2016 में एक ही पैकेज्ड प्रोडक्ट के लिए अलग-अलग एमआरपी बताना कोई अपराध नहीं था।
जस्टिस रजनीश ओसवाल ने कंपनी की ओर से अपने फैक्ट्री मैनेजर के जरिये दायर की गई याचिका को मंजूरी देते हुए निरीक्षक विधिक माप, रियासी बनाम डोमिनोज पिज्जा कटरा एवं अन्य नाम की आपराधिक शिकायत को खारिज कर दिया। यह प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट, रियासी की अदालत में लंबित थी। हाईकोर्ट ने संज्ञान लेने के आदेश को भी रद्द कर दिया।
मामला 25 अक्टूबर, 2016 को कटरा के डोमिनोज पिज्जा में किए गए एक निरीक्षण से जुड़ा था। विधिक माप विज्ञान विभाग ने आरोप लगाया था कि 600 एमएल कोका-कोला की बोतल की कीमत 60 रुपये थी। वही उत्पाद खुले बाजार में 35 रुपये में मिल रहा था। विभाग ने 25 रुपये के अंतर को ज्यादा चार्ज माना। लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट और पैकेज्ड कमोडिटीज रूल्स के तहत मामला बनाया।
याचिकाकर्ता कंपनी के वकील ने तर्क दिया कि उत्पाद पर सभी एमआरपी प्रिंटेड थी। उस समय किसी निर्माता पर अलग-अलग व्यापार चैनल के जरिये बेचे जाने वाले एक जैसे उत्पाद के लिए अलग-अलग एमआरपी घोषित करने पर कोई कानूनी रोक नहीं थी। वहीं, प्रतिवादियों के वकील ने अभियोजन का बचाव करते हुए कहा कि खुले बाजार में 35 रुपये में मिलने वाली बोतल के लिए 60 चार्ज करना गैर-कानूनी तरीके से ज्यादा पैसा वसूलना था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अलग-अलग एमआरपी पर रोक एक संशोधन के जरिये लगाई गई थी, जो एक जनवरी, 2018 से लागू हुआ। निरीक्षण इससे पहले 2016 में हो चुका था। बाद के संशोधन को पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता। जेएनएफ