- हाईकोर्ट ने किया जमानत देने से इंकार, कहा- धोखा देकर इसका दावा नहीं हो सकता
जम्मू। प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्यारोपी महिला को हाईकोर्ट ने जमानत देने से इंकार कर दिया। अदालत ने महिला के फेक बेबी बेल क्लेम को खारिज किया। कहा कि कोर्ट को धोखा देकर ऐसा दावा नहीं किया जा सकता। आरोपी रहमत बेगम (35) जम्मू के बाहु फोर्ट पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 302/109 के तहत ट्रायल का सामना कर रही है।
हाईकोर्ट के जस्टिस शहजाद अजीम ने कहा कि जमानत एक विवेकाधीन राहत है। गलत जानकारी देकर या आवश्यक तथ्यों को दबाकर इसका दावा नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि बीती 8 दिसंबर को याचिकाकर्ता के वकील ने याचिकाकर्ता का तीन महीने का बच्चा होने और उसे मेडिकल केयर की जरूरत का हवाला दिया था, जिस पर जेल अधिकारियों को मेडिकल जांच और कम्प्लायंस रिपोर्ट के लिए निर्देश जारी किए गए थे। हालांकि जम्मू की जिला जेल के सुपरिटेंडेंट ने बीती 17 दिसंबर की एक रिपोर्ट में याचिकाकर्ता के जेल में भर्ती होते समय उसके साथ कोई बच्चा नहीं होने की बात कही। सीनियर मेडिकल ऑफिसर की रिपोर्ट भी इसके साथ संलग्न थी, जिसमें कहा गया कि आरोपी अकेली बंद थी। कोर्ट ने इसे फर्जीवाड़ा करार दिया। अर्जी को गलतफहमी बताते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी। यह भी साफ करते हुए कि ये बातें केवल जमानत की कार्रवाई तक सीमित हैं। मुख्य मुकदमे के मेरिट पर असर नहीं डालेंगी। जेएनएफ
-
पहले भी बच्चे के नाम पर शॉर्ट टर्म बेल ले चुकी आरोपी
आदेश में लिखा है कि 11 जून, 2020 को चालान पेश होने के बाद याचिकाकर्ता ने पहले सितंबर, 2020 में प्रेग्नेंसी के आधार पर और फिर 2023 में अपने बच्चे की मेडिकल कंडीशन का हवाला देते हुए शॉर्ट-टर्म बेल ली थी। इसके बाद बीती एक सितंबर को ट्रायल कोर्ट ने शॉर्ट-टर्म बेल अर्जी खारिज कर दी। उसमें जमानत की शर्तों के उल्लंघन का हवाला दिया गया। उसमें अंतरिम बेल के दौरान आरोपी की दूसरी शादी किए जाने और बिना इजाजत ट्रायल कोर्ट के इलाके से बाहर श्रीनगर चले जाने की बात भी शामिल थी। पिटीशनर का दावा ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहा था।