- कैट ने कहा- बिना जांच और सुनवाई के सेवा समाप्त करना गलत, दो माह में फिर से जांच के निर्देश
- कहा- अनुशासन जरूरी, पर कानून की प्रक्रिया का पालन उससे भी ज्यादा अहम
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने श्रीनगर के एसएसपी की ओर से की गई एक महिला कांस्टेबल की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है। कैट ने कहा कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को बिना विभागीय जांच और सुनवाई के सेवा से हटाना कानून के खिलाफ है। कैट ने पुलिस विभाग को निर्देश दिया है कि वह दो माह के भीतर नए सिरे से जांच कर और कानून के अनुसार निर्णय लिया जाए।
मामला अनंतनाग जिले की महिला कांस्टेबल शकीला अख्तर से जुड़ा है, जो जम्मू-कश्मीर आर्म्ड पुलिस की तेरहवीं बटालियन में तैनात थीं। साल 2005 में श्रीनगर के एसएसपी ने आदेश जारी कर उन्हें नौकरी से हटा दिया था। शकीला का कहना था कि वह उस समय शादी और बीमारी के कारण छुट्टी पर थीं और उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि उनकी नौकरी खत्म की जा रही है। कैट ने कहा कि एसएसपी ने आठ, अगस्त 2005 को जो आदेश जारी किया, उसमें न तो कोई विभागीय जांच की गई थी और न ही शकीला को अपनी बात रखने का मौका दिया गया। यह कदम कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
विभाग की ओर से यह कहा गया कि शकीला को एक स्थानीय अखबार ‘वैली कश्मीर’ में प्रकाशित सूचना के जरिए ड्यूटी पर लौटने को कहा गया था। लेकिन कैट ने पाया कि उस अखबार के अस्तित्व या प्रकाशन का कोई सबूत पेश नहीं किया गया। कैट ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस जैसी अनुशासित सेवा में अनुशासन बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अधिकारी कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी करें। हर प्रशासनिक कार्रवाई संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही की जानी चाहिए। कैट ने यह भी कहा कि अगर दो माह में जांच पूरी नहीं होती है, तो विभाग को समय बढ़ाने के लिए अदालत से अनुमति लेनी होगी।