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शिकायत बेबुनियाद, महिला अफसर को फंसाने के लिए रची गई कहानी : हाईकोर्ट

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जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक महिला पुलिस अफसर के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए कहा है कि यह मामला झूठा, बेबुनियाद और बदले की भावना से दर्ज किया गया था। अदालत ने इसे कानून का दुरुपयोग कर अफसर को फंसाने की कोशिश बताया।
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यह फैसला न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी ने असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर परवीन अख्तर की याचिका पर सुनाया। परवीन अख्तर के खिलाफ पुलिस स्टेशन त्रिकुटा नगर में वर्ष 2022 एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें उन पर सरकारी काम में बाधा डालने और धमकी देने का आरोप लगाया गया था। यह शिकायत लोक निर्माण विभाग के एक वरिष्ठ विधि अधिकारी ने दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि परवीन अख्तर उनके दफ्तर में आईं, पांच लाख रुपये मांगे और मना करने पर झूठे बलात्कार के केस में फंसाने की धमकी दी।
अदालत ने पाया कि यह शिकायत कथित घटना के लगभग दो हफ्ते बाद दर्ज कराई गई थी जिससे इसकी सच्चाई पर संदेह होता है। यह भी सामने आया कि परवीन अख्तर ने इससे पहले उसी अधिकारी और अपने ससुराल पक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। अदालत ने कहा कि ऐसे हालात में दूसरी एफआईआर स्पष्ट तौर पर जवाबी कार्रवाई लगती है। न्यायमूर्ति वानी ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने बिना ठीक से विचार किए एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए, जो कानून के अनुरूप नहीं था। यह एफआईआर बाद में गढ़ी गई कहानी है जिसका मकसद शिकायतकर्ता को पहले से दर्ज मामले से बचाना था। जेएनएफ
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