अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने पूर्व खरीद (प्री-एम्पशन) के हक पर अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि यह हक बहुत कमजोर होता है और व्यक्ति के अपने व्यवहार से भी खत्म माना जा सकता है।
अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने आचरण से यह संकेत दे दे कि वह यह अधिकार इस्तेमाल नहीं करना चाहता तो माना जाएगा कि उसने यह हक छोड़ दिया और बाद में वह इस पर बार-बार दावा नहीं कर सकता।
यह फैसला न्यायमूर्ति संजय धर ने पुंछ की जमीन से जुड़े एक पुराने विवाद की सुनवाई के दौरान सुनाया। वर्ष 1976 में दुर्गा देवी और रूप चंद ने मिलकर पुंछ में एक मकान और उससे सटी जमीन खरीदी थी। बाद में रूप चंद का हिस्सा उनके बेटे ईश्वर दास ने वर्ष 1987 में इकबाल सिंह को बेच दिया। दुर्गा देवी ने दावा किया कि उन्हें पहले खरीदने का हक था और इसी आधार पर मामला अदालत में पहुंचा।
रिकॉर्ड की जांच के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि दुर्गा देवी ने 1987 में एक और दीवानी मुकदमा दायर किया था, जिसमें उन्होंने सिर्फ अतिक्रमण की शिकायत की थी। उस मुकदमे में उन्होंने पूर्व खरीद का कोई दावा नहीं किया और बाद में वह मामला खुद ही छोड़ दिया। अदालत ने माना कि यह आचरण साफ दिखाता है कि उन्होंने अपने पूर्व खरीद के हक का प्रयोग नहीं करना चाहा और इसे छोड़ दिया।