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Jammu News: मां के सामने युवक की हत्या के 13 साल पुराने मामले में महिला समेत पांच को उम्रकैद

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- गांधी नगर की वाल्मीकि कॉलोनी में 22 वर्षीय युवक पर मां के सामने तेजधार हथियारों से किया था हमला
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- अदालत ने पीड़ित परिवार को सात लाख रुपये मुआवजा देने की सिफारिश की, मुकदमे में देरी पर भी जताई चिंता





जम्मू। शहर के गांधी नगर में 22 वर्षीय युवक निशान मट्टू की हत्या के करीब 13 साल बाद अदालत ने महिला समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। 22 मार्च, 2013 को वाल्मीकि कॉलोनी में श्मशान घाट के पास निशान पर तेजधार हथियारों और बेसबॉल बैट से हमला किया गया था। प्रधान सत्र न्यायाधीश ताहिर खुर्शीद रैना की अदालत ने शुक्रवार को पांचों दोषियों को जीवन के शेष समय तक जेल में रखने की सजा सुनाई। प्रत्येक पर 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने मृतक के आश्रितों को सात लाख रुपये मुआवजा देने की सिफारिश की है।





अभियोजन पक्ष के अनुसार, 22 मार्च 2013 को शाम करीब साढ़े सात बजे निशान मट्टू वाल्मीकि कॉलोनी स्थित श्मशान घाट के पास था। इसी दौरान उसकी मां के सामने आरोपियों ने टोकों, किरचों और बेसबॉल बैट से उस पर हमला कर दिया। निशान को कई गंभीर चोटें आईं। अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने इस मामले में गांधी नगर थाने में एफआईआर दर्ज की थी। जांच के बाद पांच आरोपियों के खिलाफ हत्या, दंगा करने और हथियारों से जुड़े आरोपों में चालान पेश किया गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, हत्या के पीछे सुरिंदर कौर की बेटी से जुड़ा विवाद था। आरोप था कि सुरिंदर कौर ने ही अन्य आरोपियों को निशान की हत्या के लिए उकसाया था। अदालत ने सुरिंदर कौर, तलविंदर सिंह उर्फ सन्नी, बलविंदर सिंह उर्फ बबलू, सोनू सिंह उर्फ गीथा और सद्दाम हुसैन उर्फ सोनू को 31 अक्तूबर 2026 को दोषी ठहराया था। मामले में एक अन्य आरोपी राहुल भाटी उर्फ भल्ला को मई 2015 में किशोर घोषित कर दिया गया था। उसका मामला अलग कर दिया गया था।
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अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि उम्रकैद सामान्य सजा है, जबकि मौत की सजा केवल बेहद दुर्लभ मामलों में दी जाती है। अदालत ने मुकदमे के करीब 13 साल तक चलने पर भी चिंता जताई। इससे दोषियों को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा और जल्द सुनवाई का उनका अधिकार भी प्रभावित हुआ। अदालत ने सभी पांच दोषियों पर 50-50 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। यह राशि मृतक के कानूनी वारिसों या आश्रितों को दी जानी है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर पीड़ित मुआवजा योजना-2019 के तहत परिवार को सात लाख रुपये देने की सिफारिश की गई है। अदालत ने कहा कि दोषियों की लंबी कैद के कारण जुर्माने की वसूली मुश्किल हो सकती है। जेएनएफ
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