हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, सीबीआई को पक्षकार बनाने की मांग वाली याचिका पर दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश
जम्मू। फर्जी गन लाइसेंस मामले में सीबीआई को पक्षकार बनाने की मांग वाली याचिका पर जवाब दाखिल नहीं करने पर जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट ने केंद्र और प्रदेश सरकार को फटकार लगाई है। खंडपीठ ने भारत के उप सॉलिसिटर जनरल (डीएसजीआई) विशाल शर्मा और सीजीएससी अनीश्वर चटर्जी कौल को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का अंतिम अवसर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश (कार्यवाहक) ताशी रबस्तान और न्यायमूर्ति पुनीत गुप्ता वाली खंडपीठ ने शनिवार को गन लाइसेंस घोटाला में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसमें कहा गया कि पहले के आदेश के चार माह बीत जाने के बावजूद केंद्र सरकार जवाब दाखिल में विफल रही है। अब खंडपीठ ने जनहित याचिका में सीबीआई को पक्षकार प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का आदेश जारी करते हुए दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। याचियों की ओर से पेश हुए वकील एसएस मोहम्मद और राहुल रैना ने कहा कि यह संगीन मामला है। जम्मू-कश्मीर सरकार घोटाले में संलिप्त कुछ प्रशासनिक अधिकारियों (आईएएस) को बचाने में लगी हुई है। वकीलों ने खंडपीठ का ध्यान 23 अप्रैल, 2024 के आदेश पर डाला जब तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने डीएसजीआई को सीबीआई को पक्षकार बनाने की मांग वाले आवेदन पर आपत्तियां दर्ज करने के लिए समय दिया था। इसमें कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को फर्जी लाइसेंस घोटाले में कथित रूप से शामिल आईएएस अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन मंजूरी के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा भेजे गए प्रस्ताव के संबंध में अद्यतन स्थिति दाखिल करने का भी निर्देश दिया था, जिसकी जांच सीबीआई की चंडीगढ़ शाखा द्वारा की जा रही है। वकील एसएस अहमद ने कहा कि आरोपी आईएएस अधिकारियों को बचाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश (कार्यवाहक) ताशी रबस्तान ने कहा कि चार महीने बीत जाने के बावजूद न तो कोई जवाब दिया गया और न ही अद्यतन स्थिति दर्ज की गई। जेएनएफ