जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद और भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र रैना के सरकारी आवासों को लेकर जारी विवाद में एस्टेट विभाग (संपदा) को आखिरी मौका दिया है। अदालत ने विभाग से कहा है कि वह यह स्पष्ट करे कि अब तक इस मामले में क्या ठोस कदम उठाए गए हैं और समिति की सिफारिशों पर अंतिम फैसला कब लिया जाएगा।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि 28 फरवरी 2025 को आईजीपी (सीआईडी) की अध्यक्षता वाली समिति ने बैठक कर इस मामले की समीक्षा की थी लेकिन एस्टेट विभाग ने अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। अदालत ने इससे पहले 27 मई को भी विभाग को अंतिम अवसर दिया था। फिर भी रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से यह भी कहा गया कि विभाग अदालत के आदेशों को गंभीरता से नहीं ले रहा है और हर बार समय बढ़ाने की मांग करता है। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए उप महाधिवक्ता को आखिरी बार मौका दिया कि वे ठोस हलफनामा दाखिल करें और बताएं कि अब तक क्या कार्रवाई की गई है। मुख्य न्यायाधीश अरुण पाली और न्यायमूर्ति रजनीश ओसवाल की खंडपीठ ने जनहित को देखते हुए मामले को 27 अक्तूबर 2025 को फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं। जेएनएफ