- आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज होने के बावजूद जमीन बेचने का हक बरकरार
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- तहसीलदार को सात दिन में जारी करना होगा राजस्व दस्तावेज
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने का यह मतलब नहीं है कि उसे अपनी जमीन बेचने से रोका जा सकता है। अदालत ने कहा कि अपराधी भी अपनी जमीन बेचने का हक रखता है।
यह आदेश न्यायमूर्ति संजय धर ने उस याचिका पर सुनाते हुए दिया जिसमें बिश्नाह के अरुण देव सिंह ने अपनी जमीन की बिक्री के लिए राजस्व दस्तावेज (फर्द इंतिखाब) न मिलने की शिकायत की थी। तहसीलदार बिश्नाह ने इस दस्तावेज को जारी करने से पहले अपराध शाखा से अनुमति पत्र (एनओसी) मांगा था, क्योंकि सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी समेत कई धाराओं में प्राथमिकी दर्ज है।
अदालत ने कहा कि दर्ज एफआईआर का जमीन से कोई संबंध नहीं है और केवल मुकदमे की वजह से दस्तावेज रोकना कानूनन गलत है। न्यायालय ने तहसीलदार को निर्देश दिया कि वह सात दिन के भीतर याची की अर्जी पर कानूनी प्रावधानों के तहत फैसला लें और जमीन बिक्री से जुड़ा राजस्व दस्तावेज जारी करें।