जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को दो अहम फैसले सुनाए। जम्मू के युवक की नशा तस्करी में संलिप्तता के चलते हिरासत को कायम रखा, जबकि राजौरी के एक युवक की सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत रद्द कर दी।
जम्मू निवासी मोहम्मद मुश्ताक को पिछले तीन अलग-अलग मामलों में दोषी पाया गया था और कई बार जमानत मिलने के बावजूद वह नशे के कारोबार में शामिल रहा। अदालत ने कहा कि सामान्य कानून उसे रोकने में असफल रहा है और हिरासत समाज, खासकर युवाओं की सुरक्षा के लिए जरूरी है। इसके विपरीत, राजोरी निवासी इम्तियाज अहमद की हिरासत पुराने मामलों (2013 और 2017) पर आधारित थी और वर्तमान स्थिति से इसका कोई संबंध नहीं था। अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 22(5) का उल्लंघन बताते हुए रद्द कर दिया और उन्हें तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। जेएनएफ