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पीड़िता के बयान को आंख मूंदकर सच नहीं माना जा सकता, विश्वसनीयता जरूरी : कोर्ट

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- दुष्कर्म के आरोपी को कोर्ट ने दी अग्रिम जमानत
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अमर उजाला ब्यूरो

जम्मू। फास्ट ट्रैक कोर्ट जम्मू के पीठासीन अधिकारी अमरजीत सिंह लंगेह ने दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी अनिल कुमार को अग्रिम जमानत दे दी है। आरोपी पर 21 मई, 2025 की रात गांधीनगर इलाके में एक महिला के घर में घुसकर दुष्कर्म करने का आरोप है। पीड़िता ने घटना के दो घंटे बाद रात 11:30 बजे गांधीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।



जांच में सामने आया कि पीड़िता और आरोपी की पहचान इंस्टाग्राम के जरिये हुई थी और पहले पति से रिश्ते बिगड़ने के दौरान दोनों में नजदीकियां बढ़ीं। बताया गया कि आरोपी ने शादी का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन जब पीड़िता ने तलाक लिया, तो वह पीछे हट गया। महिला ने 10 सितंबर, 2023 को दूसरी शादी कर ली। उसका दूसरा पति भी अब उसे छोड़कर कनाडा चला गया है।
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जांच में यह भी पता चला कि घटना के दिन रात 8:41 से 8:56 के बीच दोनों के बीच चार बार मोबाइल पर बातचीत हुई और कथित घटना के बाद भी रात 11:26 पर पीड़िता ने आरोपी से पांच मिनट बात की। कोर्ट ने सवाल उठाया कि गांधीनगर जैसे व्यस्त इलाके में कोई शख्स रात 9:30 बजे किसी महिला के घर घुसे और किसी को भनक तक न लगे, यह बात आसानी से हजम नहीं होती।
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कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता के बयान को आंख मूंदकर सच नहीं माना जा सकता। बयान की विश्वसनीयता जरूरी है और अगर कथित घटना के बाद पीड़िता आरोपी से लंबी बात करती है, तो यह एक अजीब और असामान्य प्रतिक्रिया है। कोर्ट ने मेडिकल रिपोर्ट में आरोप की पुष्टि न होने और आरोपी द्वारा किसी भी आपत्तिजनक फोटो को सोशल मीडिया पर साझा न करने की बात भी दर्ज की। इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को सशर्त अग्रिम जमानत दी।
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