कहा, मजबूरी में मिली नियुक्ति को तुरंत चुनौती देने वाला उम्मीदवार भी पा सकता है ऊंचा पद
जल शक्ति विभाग के मामले में कैट का आदेश रखा बरकरार, प्रशासन को पात्रता जांचने के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि अगर कोई व्यक्ति आर्थिक तंगी के कारण दबाव में निचले पद पर अनुकंपा नियुक्ति स्वीकार कर लेता है और जल्द ही उसे चुनौती दे देता है, तो वह अपनी योग्यतानुसार ऊंचे पद का हक नहीं खोता। अदालत ने यह फैसला जल शक्ति विभाग के एक कर्मचारी एवं उधमपुर निवासी अमित शर्मा के मामले में सुनाया है।
अमित शर्मा के पिता सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी (पीएचई) विभाग में कार्यकारी अभियंता थे। सेवा के दौरान उनका निधन 17 सितंबर, 2020 को हुआ। अमित शर्मा ने अपनी बीटेक की योग्यता के आधार पर जूनियर इंजीनियर (यांत्रिक) के पद पर अनुकंपा नियुक्ति की मांग की। विभाग ने भी उसकी मांग का समर्थन किया और सामान्य प्रशासन विभाग को जूनियर इंजीनियर पद पर नियुक्ति की सिफारिश भेजी। विभाग ने फाइल लौटाते हुए कहा कि आवेदक को सबसे निचले गैर-राजपत्रित पद पर रखा जाए। इसके बाद विभाग ने अमित को फिटर के पद पर नियुक्त किया।
नियुक्ति के 12 दिन बाद ही उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में चुनौती दे दी। कैट ने अमित की याचिका स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि उन्हें उसी दिन से जूनियर इंजीनियर (यांत्रिक) के पद पर माना जाए, जब उन्होंने फिटर के रूप में कार्यभार संभाला था। प्रशासन ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी और कहा कि जब अमित शर्मा ने फिटर का पद स्वीकार कर लिया, तो वे बाद में ऊंचे पद की मांग नहीं कर सकते। अमित की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने यह पद आर्थिक संकट के कारण स्वीकार किया था, क्योंकि वे परिवार के अकेले कमाने वाले सदस्य थे।
प्रशासन की याचिका खारिज, जेई के पद पर नियुक्ति के आदेश
न्यायमूर्ति संजीव कुमार और न्यायमूर्ति संजय परिहार की पीठ ने प्रशासन की दलील खारिज करते हुए कहा कि यह नियुक्ति स्वेच्छा से नहीं, बल्कि वित्तीय मजबूरी में ली गई थी। अमित ने केवल बारह दिनों में ही इसे चुनौती दी, इसलिए ‘एस्टॉपल’ का सिद्धांत (यानी ऊंचे पद के दावे पर रोक) इस पर लागू नहीं होता। अदालत ने यह भी कहा कि अमित की स्थिति उन अन्य उम्मीदवारों से अलग नहीं थी, जिन्हें समान योग्यता के आधार पर जूनियर इंजीनियर के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी। सरकार यह साबित नहीं कर सकी कि उनके साथ अलग व्यवहार क्यों किया गया। हाईकोर्ट ने कैट के आदेश को बरकरार रखते हुए प्रशासन को निर्देश दिया कि अमित की योग्यता और पात्रता की जांच कर उन्हें जूनियर इंजीनियर (यांत्रिक) के पद पर नियुक्त किया जाए।