जम्मू। रिश्वत मामले में लोक निर्माण विभाग के एसई हिलाल शेख और एईई कृष्ण कौल को जमानत मिल गई है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मोहन लाल ने अपीलकर्ताओं की तरफ से वकीलों की दलीलें सुनने के बाद जमानत दी। सीबीआई ने इन दोनों के अलावा जेई को भी 1.50 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था, जिसे पहले ही जमानत मिल चुकी है। तीनों उधमपुर में तैनात हैं।
उन्होंने कहा कि गैर-जमानती अपराध में जमानत देने या अस्वीकार करने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद -21 में निहित ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता’ की अवधारणा सर्वोपरि है और सामान्य नियम यह है कि ‘जमानत नियम है’ और ‘जेल’ एक अपवाद’। याचिकाकर्ता पिछले 24 दिनों से अधिक समय से हिरासत में हैं और वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं और अब जांच के उद्देश्य से इसकी आवश्यकता नहीं है। आपराधिक न्यायशास्त्र का मूल सिद्धांत यह है कि एक आरोपी को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक कि उसके खिलाफ अपराध साबित नहीं हो जाता।
याचिकाकर्ताओं को निरंतर हिरासत में रखने से उनके जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा, जोकि उनके कारावास और पूर्व-परीक्षण दंड देने के बराबर होगा, जोकि आपराधिक न्यायशास्त्र के जनादेश के खिलाफ है, क्योंकि सजा पूरी तरह से सुनवाई के बाद और उसके बाद ही दी जा सकती है। लिहाजा 50 हजार के बांड पर दोनों को जमानत दी जा रही है। हालांकि दोनों लोग इस मामले की जांच को अपने प्रभाव या किसी अन्य तरीके से प्रभावित नहीं करेंगे।
नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दो को 20 साल की कैद
जम्मू। फास्ट ट्रैक कोर्ट के पीठासीन अधिकारी सुरिंदर सिंह ने दुष्कर्म के 11 साल पुराने मामले में दो दोषियों मोहम्मद इशाक और अब्दुल राशिद को 20 साल कैद की सजा सुनाई। दोनों ने 2011 में एक नाबालिग का पहले अपहरण और इसके बाद दुष्कर्म किया। नाबालिग के घर से 70 हजार की नकदी, 50 तोला चांदी के गहने और सोने की अंगूठियां भी चोरी कीं। दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि दोनों के खिलाफ साबित हो चुका है कि इन लोगों ने अपहरण और दुष्कर्म किया। दोनों ने जानबूझ कर सोची समझी साजिश के तहत अपराध किया। इनके चंगुल से पुलिस ने पीड़िता को छुड़ाया। लिहाजा दोनों के संगीन अपराध के चलते 20 साल की सजा सुनाई जा रही है।