जम्मू। जम्मू विकास प्राधिकरण (जेडीए) की जमीन पर धोखे से फ्लैट निर्माण का मामला सामने आया है। हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका में इस मामले को उठाया गया। फ्लैट निर्माण की प्रक्रिया में 100 करोड़ रुपये का लेन देन हुआ है। मामले की गंभीरता और इसमें जनहित के शामिल होने के चलते जस्टिस राजेश बिंदल ने मामले को बड़ी पीठ के पास भेज दिया है। 18 मार्च को इस मामले पर सुनवाई होगी। यह भी आदेश दिया है कि यह रिट याचिका एस के भल्ला बनाम जम्मू-कश्मीर सरकार एवं अन्य के खिलाफ दायर पीआईएल नंबर 19/2011 के साथ सूचीबद्ध की जाए।
एडवोकेट राजिंदर सिंह जमवाल ने रिट याचिका दायर की थी।
इस याचिका के तहत हाईकोर्ट की खंडपीठ जम्मू और सांबा जिले में जेडीए जमीन की चारदीवारी और माफियाओं से जमीन वापस लेने की प्रक्रिया की निगरानी कर रही थी। शुक्रवार को जज राजेश बिंदल ने मामले को बड़ी पीठ के पास भेजने का हवाला देते हुए कहा कि तात्कालिक रिट याचिका में जो मुद्दा उठाया गया है, ठीक इसी तरह का मामला बड़ी पीठ के पास भी लंबित पड़ा हुआ है। रिट याचिका दायर करने वाले एडवोकेट राजिंदर सिंह जमवाल ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने 2014 को जेएंडके कोआपरेटिव हाउसिंग कारपोरेशन लिमिटेड से 4 बेडरूम वाले फ्लैट के अधिकार खरीदे थे। यह फ्लैट जम्मू के सिद्दड़ा तवी विहार स्थित रिवर कैसल अपार्टमेंट में है। कारपोरेशन के एमडी ने उस समय होराइजन कंस्ट्रक्शन नाम के बिल्डर से इसके निर्माण का अनुबंध किया। नरेश सब्रवाल निवासी त्रिकुटा नगर ने होराइजन कंस्ट्रक्शन की मदद से रिवर कैसल अपार्टमेंट नाम से आवासीय फ्लैट बनाने का अनुबंध किया। इस प्रोजेक्ट की निर्माण योजना नगर निगम जम्मू की तरफ से मंजूर की गई। जिसमें खसरा नंबर 4 और 5 के तहत 9 कनाल 10 मरले जमीन पर फ्लैट बनाने की अनुमति दी गई। लेकिन यह फ्लैट जेडीए की जमीन खसरा नंबर 3 पर बनाए गए। इस मामले को रिट याचिका दायर कर उठाया गया। जिस पर कारपोरेशन के एमडी ने रोक लगवा दी। रोक लगवाने के बाद कई लोगों को फ्लैट बेचे गए। लोगों को यह पता नहीं था कि जेडीए की जमीन पर धोखे से फ्लैट बनाए जा रहे हैं। अपीलकर्ता ने इस मामले को जेडीए और राजस्व विभाग के समक्ष उठाया। जिसके बाद जेडीए ने काम रुकवा दिया। लेकिन निर्माण करने वाले बिल्डर ने अपने कर्मचारी मंजीत सिंह के जरिए रिट याचिका दायर कर दी। जिससे जेडीए की जमीन पर निर्माण का कार्य फिर शुरू हो गया। अपीलकर्ता ने कोर्ट को बताया कि 100 करोड़ से अधिक पैसा इन फ्लैट के निर्माण से जुटाया गया है। दलीलें सुनने के बाद जज ने मामले की गंभीरता और लोकहित को देखते हुए इसे सुनवाई के लिए बड़ी पीठ के पास भेज दिया।