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सचिव और एमडी दफ्तरों से निकलें और पर्यटन के लिए रणनीति बनाएं : हाईकोर्ट

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जम्मू। हाईकोर्ट ने प्रदेश के पर्यटन विभाग और पर्यटन निगम पर सख्त टिप्पणी की है। जस्टिस राजेश बिंदल ने पर्यटन एवं कानून विभाग के सचिव और पर्यटन निगम के एमडी को कहा है कि अपने दफ्तरों से बाहर निकलें। कुर्सी छोड़ें और प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक संयुक्त रणनीति तैयार करें। सिर्फ दरबार मूव की तैयारियों और कर्मियों के रहने का बंदोबस्त करने में ही समय व्यतीत न करें। हाईकोर्ट में आई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस बिंदल ने यह बात कही।
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दरअसल, जम्मू पीरखो, महामाया मंदिर के लिए रोपवे प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके लिए तीन स्थानों पर रेस्तरां बनाए जाने थे, लेकिन पांच बार टेंडर जारी करने के बावजूद यह रेस्तरां शुरू नहीं हो पाए। टेंडर का आवेदन करने वाली एक कंपनी ने टेंडर जारी करने संबंधी याचिका दायर की थी। जिस पर सोमवार को सुनवाई की गई। याचिका में कहा गया कि पर्यटन विभाग ने 2018 में एक टेंडर जारी किया था। इसमें कहा गया कि तीन जगहों पर रेस्तरां किराए पर देने हैं। पांच साल के लिए यह रेस्तरां दिया जाना था। 2.5 करोड़ रुपये की टर्नओवर रखने वाली कंपनी और तीन वर्षों की बैलेंस शीट लगाकर टेंडर जमा कराना था। इसकी फीस 10 लाख रुपये थी, लेकिन 2018 से 2019 तक पांच बार टेंडर जारी करने के बावजूद भी रेस्तरां नहीं दिया गया।
जज ने कहा कि केबल कार कारपोरेशन और पर्यटन विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जम्मू एक अहम स्थान है। यहां से होकर लोग वैष्णो देवी तक पहुंचते हैं, लेकिन जम्मू में पर्यटन के नाम पर कुछ है ही नहीं। कई संभावनाएं होने के बावजूद पर्यटन को बढ़ावा नहीं दिया गया है। प्रोजेक्ट की कोई जानकारी तक नहीं। निगम और विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी कोई जानकारी नहीं। 1995 में जम्मू में केबल कार प्रोजेक्ट बना था। जिसका काम 2016 में 21 साल बाद शुरू हुआ और आज तक पूरा नहीं हुआ। यह पूरी तरह से विजन की कमी है। जो विभाग के लोगों के पास नहीं। जस्टिस बिंदल ने कहा कि यह वक्त मानसिकता को बदलने का है। लोगों के पैसों का दुरुपयोग बंद करें। निजी लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए लोगों के पैसों को बर्बाद न करें।
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कृत्रिम झील और रोपवे प्रोजेक्ट पर रिपोर्ट नहीं दी, आयुक्त सचिव को जुर्माना
जम्मू। जम्मू में बनने वाली कृत्रिम झील और मुबाकरमंडी रोपवे प्रोजेक्ट पर रिपोर्ट पेश न करने पर हाईकोर्ट ने बाढ़ नियंत्रण पीएचई विभाग के आयुक्त सचिव पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही अंतिम अवसर देकर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। होटल एवं लाज एसोसिएशन के प्रधान इंद्रजीत खजुरिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया गया। चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस राजेश बिंदल वाली खंडपीठ ने सोमवार को इस मामले पर सुनवाई की।
2014 से यह मामला विचाराधीन है। कोर्ट ने महसूस किया कि मार्च 2020 को हमने ताजा रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन आज तक यह रिपोर्ट पेश नहीं की गई। इसमें सात महीने का वक्त निकल चुका है। लिहाजा अंतिम अवसर दिया जाता है। रिपोर्ट को पेश करें। साथ ही 15 हजार रुपये एडवोकेट वेलफेयर फंड में जमा कराएं। एक हफ्ते में पैसे जमा करें और चार हफ्तों के भीतर स्टेटस रिपोर्ट भी पेश करें।
रिश्वत के आरोपी सीएपीडी कर्मी की जमानत अर्जी खारिज
जम्मू। रिश्वत लेते पकड़े गए सीएपीडी विभाग के जूनियर सहायक की जमानत अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दिया। सोमवार को सीबीआई के स्पेशल जज राजेश सीकरी ने मंजाकोट टीएसओ कार्यालय में तैनात शादाब चौधरी की याचिका पर सुनवाई की। आरोपी को सीबीआई ने 10 अक्तूबर को पकड़ा था। आरोप है कि उसने एक ठेकेदार को पेमेंट देने के बदले रिश्वत की मांग की थी। जज ने कहा कि बेशक इसे एक छोटा अपराध समझा जाए, लेकिन इससे भी इंकार नहीं कर सकते कि पैसा लिया गया। इस तरह के अपराध समाज को खोखला करते हैं। इसमें कम से कम 7 साल की सजा का प्रावधान है। लिहाजा आरोपी को अभी जमानत देने का कोई आधार नजर नहीं आता।
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