जम्मू। भ्रष्टाचार और अन्य गंभीर अपराधों की जांच में देरी पर हाईकोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की खिंचाई की है। पुराने मामलों में दर्ज एफआईआर की जांच में देरी होने और कोर्ट में चालान पेश न करने पर कोर्ट ने सख्ती बरती। जस्टिस संजय धर और जस्टिस राजेश बिंदल वाली खंडपीठ ने इसे लेकर दर्ज जनहित याचिका वीरवार को सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि एसीबी मामलों की जांच पर कुंडली मार कर बैठ गया है। जजों की खंडपीठ ने महसूस किया कि जिस तरीके से एसीबी ने केस दर्ज किए, उससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता। एसीबी पर तल्ख टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यदि एसीबी मामलों की जांच करने में खुद को अक्षम महसूस कर रहा है तो कोर्ट को बता दें। मामलों की जांच को किसी नतीजे पर पहुंचाने का कोई और विकल्प निकाला जा सकता है। मामले लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़े हुए हैं। सामान्य प्रशासनिक विभाग से हाईकोर्ट ने इसे लेकर जानकारी भी मांगी। जानकारी न देने पर अगली तारीख पर सचिव को निजी तौर पर कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए।
इससे पहले हाईकोर्ट ने जीएडी विभाग से जानकारी मांगी थी कि कितने कर्मी और अफसर भ्रष्टाचार के मामले में शामिल हैं। इनके ऊपर क्या कार्रवाई की गई? क्या यह निलंबित हैं या नहीं। क्या कर्मी अफसर किसी जघन्य अपराध में शामिल हैं। क्या इसके बावजूद भी प्रमोशन दी गई।
21 जुलाई 2020 को याचिका दायर होने के बाद हाईकोर्ट को मिली जानकारी में यह सामने आया कि बहुत से कर्मियों के खिलाफ केस दर्ज हैं। जिनके खिलाफ जांच पूरी नहीं हुई। कई तो ऐसे मामले हैं, जो तीन दशक पुराने हैं। 1998 से लेकर 2018 एफआईआर एसीबी ने दर्ज की और इनमें से 31 की जांच लंबित पड़ी है। 35 मामले चालान पेश करने के लिए अभियोजन की मंजूरी के इंतजार में हैं। कुल मिलाकर अलग-अलग बाधाओं के चलते 295 में से 192 मामले जांच के लिए लंबित पड़े हुए हैं। 2009, 2012, 2013, 2015 और 2016 में कई मामले मंजूरी के लिए भेजे गए, लेकिन मंजूरी नहीं मिली। तीन साल पहले पीओ को मामले की जांच संबंधित आदेश दिया था। जिस पर अमल नहीं हुआ। 2011 में पूर्व मंत्री, प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन कंपनी के एमडी, जीएम, सीनियर आईएएस और केएएस, सीईओ सीडीए, निदेशक प्लानिंग विभाग समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज हुए। इनकी जांच भी पूरी नहीं हुई। जेडीए के पूर्व चेयरमैन, संयुक्त आयुक्त नगर निगम जम्मू, एमडी वित्तीय निगम, राजस्व अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज हैं।
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... तो अपराधियों को बचा रही जांच एजेंसी
हाईकोर्ट ने पाया किया कि 1998 में दर्ज एक मामले की जांच भी लंबित है। इसके पीछे तर्क दिया गया है कि संबंधित कार्यालय ने जानकारी नहीं दी। अगर जांच एजेंसी जांच नहीं कर पाती तो कोर्ट ने कई ऐसे मामलों की जांच वापस की है। लेकिन एसीबी अपराधियों को बचा रही है। जिनके खिलाफ लचर जांच हो रही है। बहुतचर्चित रोशनी मामले की जांच भी किसी नतीजे तक नहीं पहुंची। जेएनएफ