जम्मू। सरकारी डाक्टरों की निजी प्रेक्टिस पर प्रतिबंध लगाने संबंधी याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार से 6 नवंबर से पहले स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। कानून की छात्रा सुगंधा साहनी की जनहित याचिका पर बुधवार को चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस राजेश बिंदल वाली खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई की। इस पर संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव और स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के आयुक्त सचिव को मामले में रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकारी डाक्टर बड़े स्तर पर मरीजों से फीस वसूलते हैं, जिसकी कोई रसीद नहीं दी जाती। रसीद देने की जगह निजी डायरी पर रिकार्ड नोट किया जाता है। ड्यूटी के वक्त सरकारी डाक्टर अपने निजी क्लीनिकों में प्रेक्टिस करते हैं। जिनको अनुमति नहीं, वो भी प्रेक्टिस करते हैं। यह सरकारी नियमों और आदेशों का उल्लंघन है। डाक्टरों ने बाकायदा केमिस्ट की दुकानें भी खोल रखी हैं। वह दवाई भी ऐसी देते हैं, जो सिर्फ इन्हीं दुकानों पर मिलती हैं।
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महिला सरपंच पर एक लाख की कमीशन लेने का आरोप
हाईकोर्ट ने ग्रामीण विकास विभाग के आयुक्त सचिव को जांच के आदेश दिए
जम्मू। राजोरी जिले की अपर कंडी पंचायत की महिला सरपंच पर पंचायत के 7 पंचों ने कमीशन लेने का आरोप लगाया है। पंचों ने हाईकोर्ट में शिकायत की है। इसमें बताया गया कि मगनरेगा के तहत मजदूरों का पैसा जारी करने के लिए 4 अप्रैल 2020 को एक लाख रुपये की कमीशन दी गई। जस्टिस राजेश बिंदल ने ग्रामीण विकास विभाग के आयुक्त सचिव को आदेश दिया है कि वह इन गंभीर आरोपों की जांच करवाएं। इसकी स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में दायर करने के लिए भी कहा गया।
आरोप में कहा गया कि महिला सरपंच परवीन अख्तर ने अपने पति मोहम्मद अयूब और पुत्र शाह नवाज की मौजूदगी में यह पैसा लिया था। पंचों को सरपंच ने कहा कि 7 वार्ड के लिए 15 लाख मगनरेगा का जारी होगा। इसके लिए एक लाख रुपये की कमीशन लगेगी। बुधवार को मामले की सुनवाई की दौरान सरकारी वकील ने कहा कि इस मामले की जांच की गई है। इसकी रिपोर्ट कोर्ट में सौंपी जाएगी। एडवोकेट शकील अहमद ने पंचों की तरफ से कहा कि उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। बहरहाल, जज ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।