ट्विटर पर अपनी टिप्पणियों से चर्चा में रहने वाले निलंबित आईजीपी बसंत रथ पर कोर्ट ने अपमानजनक टिप्पणियां करने से रोका है। जम्मू के व्यवसायियों की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए द्वितीय अतिरिक्त मुंसिफ जम्मू जीवन कुमार शर्मा ने इस बाबत आदेश जारी किया।
कोर्ट ने कहा कि सुनवाई की अगली तारीख तक आईजी बसंत रथ ऐसी कोई टिप्पणी न करें जिससे वादी पक्ष के सम्मान को ठेस पहुंचती हो। प्रवीण कुमार मित्तल, वीरेंद्र दुबे, सौरभ डांग, राहुल बंसल, दविंदर वर्मा और अमित कोहली ने कोर्ट से आईजी की टिप्पणियों पर रोक की मांग की थी।
दायर मुकदमे में वादी पक्ष ने कहा कि आईपीएस कैडर के अफसर बसंत रथ पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह को ट्विटर पर दिल्लू कहते हैं और कई बेबुनियाद आरोप लगाते हैं। यही नहीं, वादी पक्ष के सम्मान को ठेस पहुंचाने से प्रेरित टिप्पणियां भी कर रहे हैं।
अब चूंकि वह अपनी इन अपमानजनक टिप्पणियों के साथ न्यूज चैनल पर आने की बात कह रहे हैं, ऐसे में वादी पक्ष को कोर्ट की शरण में आना पड़ा है। वादी पक्ष ने कहा कि आईजीपी को अभिव्यक्ति की आजादी के तहत अधिकार हैं, लेकिन इस आजादी में किसी के मान-सम्मान और गरिमा को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं मिलता। अतिरिक्त मुंसिफ जम्मू जीवन कुमार शर्मा ने दलीलें सुनकर पाया कि टिप्पणियां आपत्तिजनक हैं। कोर्ट अगली सुनवाई तक प्रतिवादी को इस तरह की टिप्पणियां करने से रोक के आदेश देता है।