एडवोकेट संजय वर्मा और धीरज चौधरी द्वारा हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को नोटिस जारी करते हुए पूछा कि राष्ट्र के खिलाफ बयान देने वाले अलगाववादी मसर्रत आलम के खिलाफ उन्होंने क्या कार्रवाई की है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से आग्रह किया कि उससे जुड़ी खबरों पर प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही प्रेस काउंसिल आफ इंडिया एक्ट के तहत बोर्ड समाचारों का सेंसरशीप करे। हाईकोर्ट के जस्टिस हसनैन मसूदी और जस्टिस जनक राज कोतवाल की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद सरकार को नोटिस कर एक दिन में यह बताने को कहा कि उन्होंने अब तक अलगाववादी नेता के खिलाफ क्या कदम उठाए।
वकीलों ने कहा कि अलगाववादी नेता की रैली में मात्र 150-200 लोग उपस्थित थे, लेकिन समाचार एजेंसियों ने इसे बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जा रहा है। इसमें दिखाया गया कि पूरी रियासत भारत के खिलाफ है। इससे रियासत की शांति भंग हुई। खंडपीठ ने सरकार से एक दिन में जवाब मांगने के साथ याचिका को बुधवार के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए।
जेएनएफ