जम्मू-कश्मीर रियासत की सरकार ने भले ही जीएसटी लागू करने में सप्ताह भर का समय अधिक लिया, लेकिन जम्मू विश्वविद्यालय ने जीएसटी को बीकॉम के कोर्स में शामिल करने में कतई देरी नहीं की। छात्र-छात्राएं अगस्त से शुरू होने वाले शैक्षिक सत्र में बीकॉम में जीएसटी पढ़ेंगे। उन्हें बीकॉम के तीसरे सेमेस्टर में सेंट्रल जीएसटी के बारे में पढ़ाया जाएगा। इसके अलावा चौथे सेमेस्टर में छात्र-छात्राएं जम्मू-कश्मीर स्टेट जीएसटी के बारे में पढ़ेंगे।
इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। अभी तक बीकॉम के तीसरे सेमेस्टर में छात्र-छात्राओं को वैकल्पिक विषय के रूप में टैक्स प्रोसीजर एंड प्रैक्टिसेज (सर्विस टैक्स एंड वैट) के बारे में पढ़ाया जा रहा था। इसकी पहली यूनिट सर्विस टैक्स के बारे में थी, जबकि बाकी चारों यूनिट्स वैट (वैल्यू ऐडेड टैक्स) की व्याख्या पर थीं।
जम्मू विश्वविद्यालय की बोर्ड ऑफ स्टडीज की सदस्य और कामर्स की विभागाध्यक्ष नीतू अंडोत्रा के मुताबिक विश्वविद्यालय ने पहले ही जीएसटी को देखते हुए पाठ्यक्रम में तब्दीली लाने की तैयारी शुरू कर दी थी। उनके मुताबिक स्कीम पांचवें और छठे सेमेस्टर में जीएसटी को पढ़ाने के बारे में थी, लेकिन अब इसे तीसरे और चौथे में पढ़ाने का तय किया है। उनके मुताबिक जीएसटी लगने के बाद पुराने टैक्स सिस्टम के बारे में उन्हें पढ़ाने का कोई औचित्य नहीं रह गया है।
लेकिन यह सवाल भी....
जम्मू विश्वविद्यालय में जीएसटी को कोर्स में शामिल तो किया जा रहा है, लेकिन यह सवाल भी है कि क्या वक्त पर बदले हुए कोर्स की किताबें छात्र-छात्राओं को मुहैया हो पाएंगी? नया शैक्षिक सत्र आने वाली एक अगस्त से शुरू हो जाएगा। विश्वविद्यालय के पास पूरी कवायद को अंजाम देने के लिए महज 20 दिन का वक्त है।