कोरोना वायरस से बचाव के लिए सबसे अहम हाथ धोना है। आप किसी अल्कोहलिक सैनेटाइजर या अच्छे साबुन से हाथ धो सकते हैं। सामान्य तौर पर आपको साबुन से हाथ धोने चाहिए। आप हाथ दिन में कितनी बार धोते हैं यह आपके कामकाज पर निर्भर करता है। मसलन आप दिन में कई लोगों के संपर्क में आ रहे हैं तो आपको उसी हिसाब से हाथ धोने होंगे। यह जरूरी है कि कम से कम 40-50 सेकेंड तक अच्छी तरह से साबुन लगाकर हाथ धोएं।
हाथ धोने का तरीका : साबुन पहले हथेली पर लगाएं, फिर पीछे फिंगर के बीच, दोनों हाथ और दोनों अंगूठों पर अच्छी तरह से साबुन लगाकर धोएं। हाथ धोकर साफ कपड़े या खुली हवा में सुखाएं। पुराने कपड़े से हाथ साफ न करें।
थ्री लेयर मास्क को तवज्जो दें
वैसे तो कोरोना वायरस के लक्षणों वाले मरीजों को मास्क पहनना चाहिए। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि हर कोई ऐसे मास्क का इस्तेमाल करें। प्रभावित और समूह वाले क्षेत्रों में जाने पर मास्क का इस्तेमाल करें। इसमें सामान्य रूप से थ्री लेयर मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। आइसोलेशन वार्डों में पॉजिटिव मामलों की देखभाल में जुटे डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ के साथ संदिग्ध मरीजों का सैंपल ले रहे लैब टेक्नीशियनों को एन-95 मास्क दिए गए हैं।
किसी भी खाने का कोरोना वायरस से कोई खास लेना देना नहीं है। लेकिन प्रत्येक व्यक्ति को खुद की शारीरिक क्षमता को मजबूत बनाने के लिए पौष्टिक और स्वच्छ आहार लेना जरूरी है। फलों और अन्य पौष्टिक चीजों का सेवन भी करें।
शराब और मौसम से कोई लेना देना नहीं
ऐसी अफवाहें हैं कि शराब का सेवन करके कोरोना वायरस से बचा जा सकता है, लेकिन डॉक्टर इसे नहीं मानते हैं। ऐसा कोई शोध नहीं हुआ है जिसमें पाया गया है कि शराब का सेवन करके इस वायरस से बचाव किया जा सकता है। इसी तरह तापमान बढ़ने से कोरोना वायरस खत्म होने का भी कोई शोध स्पष्ट नहीं है। मौजूदा दुनिया के कई गर्म देशों में भी कोरोना वायरस के मामले पाए जा रहे हैं।
हेल्पलाइन डेस्क से संपर्क करें
अगर आपको खुद में कोई कोरोना वायरस के लक्षण लग रहे हैं तो आप संभाग स्तरीय लैंडलाइन नंबर 0191250982 पर डायल करके संतुष्ट जानकारी पा सकते हैं। आपको डायल करने पर इलाज की सुविधा और अन्य दूसरी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जाएंगी। इसके अलावा जीएमसी और एसएमजीएस अस्पताल में भी हेल्प डेस्क स्थापित की गई है।
लक्षणः नाक बहना, सिर में तेज दर्द, खांसी और कफ, गला खराब, बुखार, थकान व उल्टी महसूस होना, सांस लेने में तकलीफ आदि, निमोनिया, ब्रोंकाइटिस
बचाव
- पीड़ितों को आइसोलेट और उनकी सही निगरानी करना
- सांस से जुड़ी बीमारी के लक्षण पर दूसरों से दूरी बनाए रखें
- प्रभावित देशों और समूह वाले क्षेत्रों में गैर जरूरी यात्राओं से बचें
- खांसी या छींकते समय अपने मुंह और नाक को अच्छी तरह से ढककर रखें
- अपने हाथ और उंगलियों से आंख, नाक और मुंह को बार बार न छुएं
- सार्वजनिक स्थलों, सार्वजनिक यातायात स्थलों पर कुछ भी छूने या किसी से हाथ मिलाने से परहेज करें
डॉ. महेश चंद्र शर्मा और डॉ. अशोक शर्मा का कहना है कि आयुर्वेदिक नुस्खों से शारीरिक क्षमता बढ़ने के साथ आसपास के वातावरण को स्वच्छ और बैक्टीरिया मुक्त बनाया जा सकता है।
आयुर्वेदिक से मिलता है बेहतर सैनेटाइजर
अगर आपको किसी तरह का रेस्प्रेटरी ट्रैक इंफेक्शन में खांसी, जुकाम आदि है तो आप अपने साथ पोटली में जायफल, मुश्कबूर, प्याज को कुतरकर उसमें इलायची, दाल चीनी, लौंग का मिश्रण करके रखें।
इस मिश्रण से निकलने वाली महक हवा में स्वच्छ सैनिटाइजर का काम करती है जो रेस्पिरेटरी इंफेक्शन को दूर करती है। यह हवा में पहुंचकर आपके आसपास आने वाले बैक्टीरिया को रोकता है। शारीरिक क्षमता को मजबूत बनाने को योग का सहारा लें।
घरों में मेडिकेटेड धुनी करें
आयुर्वेदिक पद्धति में सरसों, करंज बीज, कोंच बीज, बिलावा, गुड, नागर मोथा, छोटी हक की रुई (10-10 ग्राम जरूरत के मुताबिक) लेकर इन सब के वजन के मुताबिक राल डालकर इसका मिश्रण बना लें और कोयला या सूखे गोबर (उप्पल) पर डालकर उसकी धुनी करें। घर में ऐसा करने पर यह मेडिकेटेड धुआं कई तरह के वायरस और बैक्टीरिया को मारने के साथ जीव जंतुओं को भगा देता है। धुने के दौरान करीब आधा घंटे कमरे को बंद रखें और बाद में खोल दें।