सार्वजनिक सूचना (टीवी, अखबार, फोन, पर्चे आदि) के जरिये महामारी के प्रसार की रोकथाम के उपाय करना।
सरकार किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह जो महामारी से ग्रस्त है उसे किसी अस्पताल या अस्थायी आवास में रख सकती है।
सरकारी आदेश नहीं मानना अपराध होगा और आईपीसी की धारा 188 के तहत सजा भी मिल सकती है। इसके अलावा जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
महामारी एक्ट में सरकारी अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। अगर कोई अनहोनी होती है तो सरकारी अधिकारी की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।
कोरोना वायरस के महामारी घोषित होने से सरकारों का ध्यान खींचने में मदद मिलेगी। इससे वैश्विक स्तर पर निष्क्रियता को कम किया जा सकेगा और लोगों को सतर्क करने में मदद मिलेगी।
फंडिंग में होगी आसानी
कोरोना वायरस के महामारी घोषित होने से अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से मिलने वाली फंडिंग में आसानी होगी। बता दें कि दुनियाभर में कई ऐसे संस्थान हैं जो कोरोना से लड़ने के लिए धन मुहैया करा रहे हैं।
महामारी घोषित होते ही सभी सार्वजनिक स्थलों को बंद करने की कवायद शुरू हो जाती है। इसमें सरकार संक्रमित मरीजों को अलग रखकर इलाज कराती है और जब यह बीमारी तेजी से फैलने लगती है तो सभी सार्वजनिक स्थलों को तत्काल बंद कर दिया जाता है।
यही नहीं महामारी के संबंध में सरकारी आदेश न मानने को अपराध के अंतर्गत रखा जाता है। इसमें व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 188 के तहत गिरफ्तारी की जा सकती है।